
दुर्लभ बीमारी इंटरस्टिशल लंग डिजीज (आईएलडी) से पीड़ित राजकीय प्रताप उच्च माध्यमिक विद्यालय, अलवर के शिक्षक दिनेश चौधरी की मदद के लिए प्रदेश का शिक्षा परिवार एकजुट हो गया है। चिकित्सकों के अनुसार उनके इलाज पर करीब दो करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। इस कठिन परिस्थिति में माध्यमिक शिक्षा विभाग, बीकानेर ने संवेदनशील पहल करते हुए प्रदेशभर के लगभग तीन लाख शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों से स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग की अपील की है।
अभियान के तहत कर्मचारियों के वेतन से मात्र 45 रुपए की स्वैच्छिक राशि काटकर सहायता कोष तैयार किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि लाखों कर्मचारियों का छोटा सा योगदान मिलकर शिक्षक के इलाज के लिए बड़ी राहत बन सकता है। इस पहल को शिक्षा जगत में मानवीय संवेदना और सहयोग की मिसाल माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग के कार्मिकों के वेतन से सहायता राशि आनी शुरू हुई तो महज कुछ घंटों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने सहयोग किया। एक अगस्त को करीब 28 हजार कर्मचारियों के 45 रुपए के ट्रांजेक्शन हुए और इससे लगभग 13 लाख रुपए की राशि खाते में पहुंच गई। हालांकि इसके बाद राशि आना बंद हो गया। दिनेश की पत्नी अंबिका चौधरी का कहना है कि सहायता के लिए आदेश 27 जुलाई को जारी हुआ, जबकि अधिकांश कर्मचारियों का वेतन इससे पहले ही बन चुका था। ऐसे में कई कर्मचारी चाहकर भी वेतन कटौती के माध्यम से सहयोग नहीं कर पाए। अब तक दिनेश के इलाज के लिए करीब 20 लाख रुपए का सहयोग मिल चुका है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आदेश में प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों से स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग का आव्हान किया गया है। इसके तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन से 45 रुपए की राशि स्वैच्छिक रूप से काटी जाएगी।
वहीं, विभाग ने स्पष्ट किया है कि सहायता राशि देना पूरी तरह स्वैच्छिक है। जो कर्मचारी इस अभियान में शामिल नहीं होना चाहते, वे अपने आहरण एवं वितरण अधिकारी को लिखित में सूचना दे सकते हैं। जिन कर्मचारियों के वेतन बिल पहले ही कोषालय में जमा हो चुके हैं, वे सीधे निर्धारित बैंक खाते में नकद या ऑनलाइन माध्यम से सहायता राशि जमा करवा सकते हैं।