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अलवर जिला प्रमुख चुनावी किस्सा; जिला प्रमुख पद पर हार मिली, तो पार्षद पद से भी दिया इस्तीफा

अलवर की राजनीति में वर्ष 2015 का जिला प्रमुख चुनाव आज भी एक दिलचस्प किस्से के तौर पर याद किया जाता है। भाजपा के पास जिला परिषद में स्पष्ट बहुमत था, लेकिन क्रॉस वोटिंग के चलते पार्टी की प्रत्याशी अनुराधा शेखावत चुनाव हार गईं। इसके करीब दो महीने बाद उन्होंने जिला पार्षद पद से भी इस्तीफा दे दिया।
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Updated: 26 Oct 2026, 12:29 PM IST
alwar zila pramukh election
अलवर जिला प्रमुख चुनाव का किस्सा (फोटो - पत्रिका)

चुनाव में बहुमत होने के बावजूद हार का सामना करना पड़े तो सियासी गलियारों में चर्चा होना स्वाभाविक है। अलवर में वर्ष 2015 में जिला प्रमुख पद के चुनाव के दौरान भी ऐसा ही घटनाक्रम देखने को मिला था। जिला परिषद में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत था, लेकिन क्रॉस वोटिंग के कारण पार्टी अपना जिला प्रमुख नहीं बना सकी। भाजपा की प्रत्याशी अनुराधा शेखावत को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव के करीब दो महीने बाद उन्होंने जिला पार्षद पद से भी इस्तीफा दे दिया था।

बानसूर से जिला पार्षद चुनी गई थीं अनुराधा

अनुराधा शेखावत बानसूर क्षेत्र से जिला पार्षद चुनी गई थीं। भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए जिला प्रमुख पद के चुनाव में अपना प्रत्याशी बनाया था। उस समय जिला परिषद में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण पार्टी को अपने प्रत्याशी की जीत की उम्मीद थी। हालांकि, चुनाव के नतीजे पार्टी की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे।

बहुमत के बावजूद नहीं बना सकी जिला प्रमुख

जिला प्रमुख चुनाव में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद क्रॉस वोटिंग ने पूरे समीकरण को बदल दिया। पार्टी की प्रत्याशी अनुराधा शेखावत को हार मिली। इस घटनाक्रम ने उस समय स्थानीय राजनीति में कई सवाल खड़े किए थे। बहुमत होने के बाद भी जिला प्रमुख का पद हाथ से निकलना भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया।

जिला परिषद में संख्या बल के बावजूद चुनावी नतीजा पक्ष में नहीं आने से यह मामला चर्चा में रहा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में क्रॉस वोटिंग करने वाले सदस्यों के नाम और चुनाव में मिले मतों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं है।

दो महीने बाद पार्षद पद से भी इस्तीफा

जिला प्रमुख पद का चुनाव हारने के करीब दो महीने बाद अनुराधा शेखावत ने जिला पार्षद पद से भी इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी। जिला प्रमुख बनने का मौका गंवाने के बाद पार्षद पद छोड़ने का उनका निर्णय उस समय के चर्चित राजनीतिक घटनाक्रमों में शामिल रहा।

इसके बाद सक्रिय राजनीति से दूरी

जिला पार्षद पद से इस्तीफा देने के बाद अनुराधा शेखावत सक्रिय राजनीति में नजर नहीं आईं। हालांकि, उनके परिवार का राजनीतिक जुड़ाव बना रहा। उनके जेठ देवी सिंह शेखावत बानसूर से विधायक हैं और यूआईटी चेयरमैन भी रह चुके हैं। इस तरह वर्ष 2015 का जिला प्रमुख चुनाव अलवर की राजनीति का ऐसा किस्सा बन गया, जिसमें भाजपा के स्पष्ट बहुमत के बावजूद क्रॉस वोटिंग से नतीजा बदल गया और चुनाव हारने के बाद अनुराधा शेखावत ने जिला पार्षद पद भी छोड़ दिया।

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26 Oct 2026, 12:29 PM IST
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