
सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन पंचायत की सबसे महत्वपूर्ण जिला प्रमुख की कुर्सी पर काबिज होने वाले नेताओं की राजनीतिक निष्ठा में बदलाव की मिसाल कम ही देखने को मिली। इनमें कांग्रेस के जिला प्रमुख बलबीर छिल्लर को छोड़कर किसी ने पार्टी नहीं बदली। अलवर जिले की राजनीति में सत्ता बदलती रही और सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन जिला प्रमुख की कुर्सी पर बैठने वाले नेताओं की राजनीतिक निष्ठा में बदलाव की मिसाल कम ही देखने को मिली।
पिछले ढाई दशक में कई नेता जिला प्रमुख बने और पंचायत की राजनीति में अपनी भूमिका निभाई। इस दौरान कांग्रेस के जिला प्रमुख बलबीर छिल्लर को छोड़कर किसी अन्य जिला प्रमुख ने पार्टी नहीं बदली। राजनीतिक दलों के बीच बदलते समीकरणों के बावजूद नेताओं का अपनी पार्टी में बने रहना जिले की राजनीति का एक खास पहलू रहा है।
जिला परिषद को जिले के करीब 80 फीसदी विकास कार्यों की धुरी माना जाता है। यही वजह है कि जिला प्रमुख की कुर्सी केवल राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रतीक नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने वाला अहम पद भी है। सत्ता परिवर्तन के बावजूद नेताओं का अपनी पार्टी के साथ बने रहना जिले की पंचायत राजनीति का एक अलग पहलू उजागर करता है।
वर्ष 2000 में भाजपा के टिकट पर किरण यादव जिला प्रमुख बनीं। उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन किरण यादव भाजपा में ही बनी रही। वर्ष 2003 में विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बन गई।
वर्ष 2005 में कांग्रेस के टीकाराम जूली जिला प्रमुख बने। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, लेकिन जूली कांग्रेस में बने रहे। वर्ष 2008 में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बन गई।
वर्ष 2010 में कांग्रेस के टिकट पर सफिया खान जिला प्रमुख बनीं। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। वर्ष 2013 में भाजपा की सरकार बनने के बावजूद उन्होंने अपनी पार्टी नहीं बदली।
वर्ष 2015 में भाजपा की सरकार के दौरान कांग्रेस के टिकट पर रेखा राजू यादव जिला प्रमुख बनीं। वर्ष 2018 तक राज्य में भाजपा की सरकार रही, लेकिन रेखा कांग्रेस में ही बनी रही।
वर्ष 2021 में कांग्रेस के टिकट पर बलबीर सिंह छिल्लर जिला प्रमुख बने। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। वर्ष 2023 में भाजपा की सरकार बनने के बाद मार्च 2024 में छिल्लर भाजपा में शामिल हो गए।