
एक नवंबर से बीएस-6 डीजल बस, सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल बसों के अतिरिक्त अन्य बसों का प्रवेश दिल्ली में प्रतिबंधित रहेगा। प्रादेशिक परिवहन अधिकारी रवीन्द्र जोशी ने बताया कि इसमें ऑल इंडिया ट्यूरिस्ट परमिट और परमिट के तहत चलने वाली बसें भी शामिल हैं। साथ ही, अन्य कॉमर्शियल वाहनों के हल्के माल वाहक वाहन, मध्य माल वाहक वाहन एवं भारी मालवाहक वाहन के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। दिल्ली जाने वाले राजस्थान के वाहनों पर यह नया नियम लागू होगा। केवल उन्हीं गाड़ियां को एंट्री मिलेगी, जो बीएस-6 (भारत स्टेज-6) और इससे अधिक मानक वाली होंगी।
इन नियमों का सबसे बड़ा असर अलवर, भिवाड़ी, खैरथल, तिजारा, बहरोड़, नीमराणा समेत आस-पास के अन्य वाहन चालकों पर पड़ेगा, क्योंकि इन शहरों में रहने वाले लोगों का अक्सर दिल्ली आना-जाना होता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशानुसार, दिल्ली में पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए भी नया नियम होगा। दिल्ली में पहले से ही 10 साल से पुरानी डीजल और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियां बैन लगा हुआ है। अब नियमानुसार कोई भी वाहन जो दिल्ली के अलावा दूसरे राज्य में रजिस्टर्ड है और उसके इंजन का प्रदूषण नियंत्रण मानक बीएस-6 से नीचे है, तो उसे दिल्ली में एंट्री नहीं दी जाएगी।
यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक जारी रहेगा। दिल्ली बॉर्डर पर हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं, जो नंबर प्लेट पढ़ते ही बता देंगे कि गाड़ी में बीएस-6 इंजन है या नहीं। सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की दिल्ली में एंट्री पूर्व की तरह होती रहेगी। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाओं में लगे वाहनों को छूट दी गई है। दिल्ली में एक नवंबर से बीएस-6 से नीचे के मानक वाले पेट्रोल-डीजल से चलने वाले कमर्शियल और निजी वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं देने की नीति वर्तमान में लागू है।
एनसीआर में प्रदूषण से निपटने की तैयारियों का असली इम्तिहान शुरू होने जा रहा है। हवा की गुणवत्ता बिगड़ने और 6 नवंबर तक प्रदूषण के गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका जताई गई है। अलवर सहित एनसीआर के लिए अगले 15 दिन अहम माने जा रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल चारों राज्यों को अलर्ट किया है। एक्शन प्लान के तहत प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। अलवर के प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी इस संबंध में पूर्व तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
एनसीआर से जुड़े राज्यों में सर्दियों के दौरान प्रदूषण से निपटने के लिए एक नवंबर से विंटर एक्शन प्लान प्रभावी होगा। इसके तहत सड़कों पर पानी का छिड़काव, मशीनों से सफाई, शत-प्रतिशत कचरा उठाने और कोयले के तंदूर व डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोकथाम जैसे उपाय किए जाएंगे। पुराने मकानों को तोड़ने और निर्माण कार्यों पर भी रोक लगाई गई है।