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अलवर: झिरी के राजस्व मानचित्र पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

अलवर की प्रतापगढ़ तहसील के झिरी गांव के राजस्व मानचित्र (Revenue Map) का विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। मानचित्र को त्रुटिरहित प्रमाणित नहीं करने पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में 3 नवंबर को सुनवाई होगी। ग्रामीण लंबे समय से प्रशासन से समाधान की मांग कर रहे हैं।
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अलवर

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Rajendra Banjara

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Updated: 1 Nov 2026, 11:46 AM IST

alwar jhiri revenue map dispute

झिरी राजस्व मानचित्र विवाद: हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

झिरी गांव के राजस्व मानचित्र को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के मौजूदा राजस्व मानचित्र (Revenue Map) में कई तरह की त्रुटियां हैं। इसके कारण जमीनों की नापजोख (Land Measurement) में अंतर आ रहा है और लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने इस मामले में जिला कलक्टर (District Collector) को पत्र लिखकर मानचित्र की प्रमाणिकता स्पष्ट करने और उसे त्रुटिरहित प्रमाणित करने की मांग की थी। प्रशासन की ओर से इस दिशा में कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट (High Court) पहुंच गया। अब हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले में 3 नवंबर को सुनवाई होगी।

ग्रामीणों के अनुसार, जमीन की नापजोख के दौरान सामने आई गड़बड़ियों को लेकर संबंधित दस्तावेजों के साथ आपत्तियां भी पेश की गई थीं। एक जमीन की नापजोख में अंतर मिलने के बाद इस मामले को प्रशासन के सामने उठाया गया, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक राजस्व मानचित्र की सही स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, तब तक जमीनों की नापजोख और रिकॉर्ड को लेकर विवाद बने रहेंगे।

तहसीलदार ने एसडीएम को भेजी रिपोर्ट

इस मामले में प्रतापगढ़ तहसीलदार सुधीर जैन का कहना है कि मानचित्र को लेकर प्रशासन की ओर से जो जानकारी मांगी गई थी, उसकी रिपोर्ट एसडीएम (SDM) को भेज दी गई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मूल मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। वे चाहते हैं कि प्रशासन मौजूदा राजस्व मानचित्र की जांच कर उसकी प्रमाणिकता स्पष्ट करे, ताकि भविष्य में जमीनों की नापजोख को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं हो।

एक करोड़ रुपए देने की भी रखी थी पेशकश

ग्रामीणों की ओर से इस मामले में एक अनोखी पेशकश भी की गई थी। उनका कहना था कि यदि प्रशासन झिरी गांव के वर्तमान राजस्व मानचित्र को पूरी तरह त्रुटिरहित प्रमाणित कर देता है, तो वे एक करोड़ रुपए की राशि सामाजिक संस्था अपना घर आश्रम को देने के लिए तैयार हैं। इस राशि से जरूरतमंद लोगों को लाभ मिल सकेगा। इस संबंध में 23 सितंबर को मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम चेक भी भेजा गया था। चेक की अंतिम तिथि 5 नवंबर बताई गई है।

प्रशासन की ओर से मांग पर निर्णय नहीं होने के बाद अब मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। अदालत के नोटिस के बाद प्रशासन को अपना पक्ष रखना होगा। अब 3 नवंबर की सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या जवाब पेश करती है और ग्रामीणों की मांग पर आगे क्या कार्रवाई होती है।