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अलवर: प्याज की आवक शुरू, पर 3.5 करोड़ का इनक्यूबेशन सेंटर बंद

अलवर मंडी में प्याज की नई आवक (Onion Arrival) शुरू होते ही किसानों की उम्मीदें फिर टूटती दिख रही हैं। फसल को सही दाम दिलाने और प्रोसेसिंग के लिए 3.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ इनक्यूबेशन सेंटर (Incubation Center) तीन साल बाद भी ताले में बंद है, जिससे किसान निराश हैं।
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अलवर

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Rajendra Banjara

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Updated: 1 Nov 2026, 11:19 AM IST

alwar onion

अलवर मंडी में प्याज की नई फसल पहुंचने लगी है (फोटो - पत्रिका)

अलवर की मंडी में प्याज की नई फसल पहुंचने लगी है, लेकिन किसानों की उपज को बाजार में बेहतर कीमत दिलाने के लिए बनाया गया 3.5 करोड़ रुपए का इनक्यूबेशन सेंटर बदहाली का शिकार है। करीब तीन साल पहले तैयार हुए इस सेंटर में अब तक उत्पादन और प्रशिक्षण की शुरुआत नहीं हो सकी। लाखों रुपए की मशीनें धूल फांक रही हैं। भवन की एक दीवार पहले ही गिर चुकी है और अब दूसरी दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ कर गिरने लगा है। 

किसानों को नुकसान

जिस सेंटर से किसानों की उपज को नए उत्पादों में बदलकर अतिरिक्त आमदनी दिलाने की योजना थी, वह अब सरकारी निवेश के उपयोग का इंतजार कर रहा है। जिले में प्याज, टमाटर और बाजरे का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। फसल की आवक बढ़ने पर मंडी में भाव गिरने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। प्याज और टमाटर जल्दी खराब होने वाली उपज हैं। 

कई खाद्य उत्पाद तैयार करने की योजना

इनके लंबे समय तक भंडारण की सुविधा नहीं होने से किसानों को मजबूरी में कम भाव पर भी फसल बेचनी पड़ती है। इनक्यूबेशन सेंटर शुरू होता, तो इन उपज का प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) कर बाजार में नए उत्पाद उतारे जा सकते थे। इससे किसानों को मंडी के भाव पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलता। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत बने इस सेंटर में प्याज के फ्लेक्स और पाउडर, टमाटर की प्यूरी और सॉस तथा बाजरे का आटा, कुकीज सहित कई खाद्य उत्पाद तैयार करने की योजना थी। इसके लिए आधुनिक मशीनें लगाई गई थीं। उत्पादों की गुणवत्ता जांचने के लिए फूड टेस्टिंग लैब और पैकेजिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित थी।

महिलाओं और युवाओं को मिलना था प्रशिक्षण

यहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, किसानों और युवाओं को खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण दिया जाना था। इसके जरिए वे अपने छोटे उद्योग और स्टार्टअप शुरू कर सकें और दूसरे लोगों को भी रोजगार दे सकें। सेंटर के संचालन से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ व्यापारियों के लिए भी खाद्य उत्पादों का नया कारोबार विकसित होने की संभावना थी।

आवक के सीजन में भी नहीं मिल रहा फायदा

मंडी में प्याज की आवक शुरू होने के साथ ही सेंटर की उपयोगिता फिर सामने आ गई है। यदि इसका संचालन समय पर शुरू हो जाता तो प्याज के प्रसंस्करण से किसानों को इस सीजन में ही अतिरिक्त बाजार मिल सकता था। लेकिन संचालन शुरू नहीं होने से मशीनें अनुपयोगी पड़ी हैं और भवन भी खराब हो रहा है। अब सेंटर को चालू करने में जितनी देरी होगी, सरकारी निवेश और किसानों को मिलने वाले संभावित लाभ का नुकसान उतना ही बढ़ेगा।