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अलवर के पंचायतीराज विभाग में रिश्वतखोरी का सिलसिला, दो महीने में 4 कार्मिक गिरफ्तार; इनके खिलाफ पहले से थी शिकायतें

अलवर में पंचायतीराज विभाग में रिश्वतखोरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एसीबी ने दो महीने में चार कार्मिकों को रिश्वत लेते पकड़ा है। डेढ़ साल में छह कर्मचारियों की गिरफ्तारी से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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अलवर

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Harshita Saini

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सुशील कुमार

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Updated: 1 Nov 2026, 12:11 PM IST

Alwar Panchayati Raj Corruption

शिवराम मीणा, पूर्व कार्यवाहक BDO कठूमर और संजय यादव BDO मुंडावर

सुशील कुमार

अलवर. जिले के पंचायतीराज विभाग में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे है। महज दो माह के भीतर चार कार्मिक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के जाल में फंस चुके हैं। इनके खिलाफ पहले से ही सरकार से लेकर जिला परिषद तक शिकायतें पहुंच रही थीं। जांच कमेटियां भी गठित हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर मामला फाइलों में दबा रहा। यदि समय रहते शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई होती, तो शायद विभाग को लगातार लग रहे भ्रष्टाचार के दाग से बचाया जा सकता था। अब तत्कालीन कठूमर कठूमर बीडीओ और मुंडावर बीडीओ के ट्रैप होने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई सवालों के घेरे में है।

22 सितम्बर को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने कठ्मर पंचायत समिति के सहायक अभियंता (एईएन) शिवराम मीणा को 25 हजार रुपए तथा संविदा पर कार्यरत जेटीए मिन्ना खान को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। शिवराम मीणा के पास कठूमर बीडीओ का भी चार्ज था। आरोप था कि निर्माण कार्यों की माप पुस्तिका भरने की एवज में रिश्वत की मांग की गई थी। हाल ही में मुंडावर पंचायत समिति में एसीबी की टीम ने बीडीओ संजय कुमार यादव और कनिष्ठ सहायक रितिक सिंह चौधरी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस मामले में भी निर्माण कार्यों की माप पुस्तिका भरने के बदले राशि मांगने का आरोप सामने आया है। दो पंचायत समितियों में कम समय के अंतराल पर हुई इन कार्रवाइयों से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्माण कार्यों से संबंधित माप पुस्तिकाओं के सत्यापन और भरने की प्रक्रिया में रिश्वत की शिकायतें बार-बार क्यों सामने आ रही है? क्या विभागीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था प्रभावी नहीं है या फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का भय जिम्मेदार कार्मिकों पर असर नहीं डाल पा रहा है?

तिजारा में भी रिश्वत लेते पकड़ा था वीडीओ

पंचायती राज विभाग में रिश्वतखोरी का यह सिलसिला नया नहीं है। पिछले वर्ष तिजारा पंचायत समिति में ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) हिमांशु गुप्ता को एसीबी ने आठ हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल निलंबित चल रहा है।

डेढ़ साल में 6 अधिकारी-कर्मचारी पहुंचे जेल

पिछले डेढ़ साल में अलवर के पंचायती राज विभाग और जिला परिषद से जुड़े अलग-अलग मामलों में छह अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार होकर जेल पहुंचे हैं। इनमें पांच के मामले रिश्वतखोरी से संबंधित बताए जा रहे हैं, जबकि एक गिरफ्तारी फर्जी भर्ती प्रकरण में हुई। जिला परिषद अलवर के लिपिक राजेश यादव को जून माह में अरावली विहार थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। रिश्वतखोरी और फर्जी भर्ती जैसे मामलों के सामने आने से विभाग की पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।