
Mahendra Shastri Death : अलवर में राजस्थान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और सहकारिता आंदोलन के प्रमुख पुरोधा महेंद्र शास्त्री (95 वर्ष) का गुरुवार सुबह निधन हो गया। महेंद्र शास्त्री काफी समय से अस्वस्थ थे। अलवर में मोती डूंगरी में स्थित अपने निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से अलवर के राजनीतिक, सामाजिक और सहकारिता क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। महेंद्र शास्त्री का भरापूरा परिवार है। आज शाम 4 बजे अलवर में उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, कांग्रेस कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे।
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने मुण्डावर के पूर्व विधायक, वरिष्ठ नेता महेन्द्र शास्त्री के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। टीकाराम जूली ने महेंद्र शास्त्री जी के निधन कांग्रेस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि इस दुःख की घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवारजनों एवं समर्थकों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और परिजनों और समर्थकों को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति दे।
कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मुंडावर के पूर्व विधायक महेंद्र शास्त्री के निधन पर मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। राजनीति के साथ सहकारिता के जरिए भी उन्होंने जनसेवा का कार्य किया। उनके अनुभव का लाभ सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वालों को लगातार मिलता रहा। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति एवं परिजनों को संबल प्रदान करें। ॐ शांति।
कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने कहा कि मुण्डावर के पूर्व विधायक महेंद्र शास्त्री जी के निधन पर मैं गहरा शोक व्यक्त करता हूं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं परिजनों को यह आघात सहने का संबल प्रदान करें।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने पूर्व विधायक महेन्द्र शास्त्री के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत की आत्म शांति और शोक संतप्त परिजनों को इस दुख को सहने करने की शक्ति प्रदान करने के लिए परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना की है।
महेंद्र शास्त्री का जन्म 27 अप्रैल 1932 को अलवर के ग्राम बम्बोरा में हुआ था। उन्होंने बीए, एलएलबी, शास्त्री और साहित्यरत्न की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1985 में आठवीं राजस्थान विधानसभा के चुनाव में लोकदल पार्टी से मुंडावर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और वर्ष 1990 तक विधायक रहे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और पार्टी में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। शास्त्री की पहचान सिर्फ राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि सहकारिता आंदोलन के मजबूत स्तंभ के रूप में भी रही।
उनकी काव्य कृति 'गा ले कोई गीत' प्रकाशित हुई, जबकि 'यादों की महक' संस्मरण के रूप में सामने आई। इसके अलावा उनकी दो काव्य कृतियां और तीन गद्य पुस्तकें अप्रकाशित बताई गई हैं।