अलवर

मत्स्य यूनिवर्सिटी में 9 साल बाद फिर शुरू होगी PHD, कुलपति ने बनाई कमेटी 

राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय (अलवर) में पूरे नौ साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर पीएचडी (PHD) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। नए कुलपति की पहल पर एक छह सदस्यीय विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जो यूजीसी के नए नियमों के तहत प्रवेश प्रक्रिया को बेहद आसान और पारदर्शी बनाएगी।

2 min read
May 20, 2026
राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय

अलवर और आसपास के इलाकों में उच्च शिक्षा और रिसर्च (शोध) की चाह रखने वाले छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर आई है। राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे 9 साल बाद यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रक्रिया को दोबारा पटरी पर लाने की तैयारी तेज कर दी है। यूनिवर्सिटी में नए कुलपति के पदभार संभालते ही इस दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है। कुलपति ने छह सदस्यों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो बहुत जल्द पीएचडी में एडमिशन के नियम और पूरी प्रवेश प्रक्रिया का खाका तैयार कर लेगी।

ये भी पढ़ें

खुशखबरी! कटीघाटी में बनेगा हाईटेक चिड़ियाघर और लायन सफारी, सरकार से मांगे 180 करोड़ रुपए

2017 में पीएचडी एडमिशन के लिए आवेदन

विश्वविद्यालय प्रशासन के इस बड़े फैसले से उन सैकड़ों छात्र-छात्राओं में खुशी और उम्मीद की नई किरण जगी है, जो लंबे समय से यहीं रहकर रिसर्च करना चाहते थे। आपको बता दें कि इससे पहले यूनिवर्सिटी ने साल 2017 में पीएचडी एडमिशन के लिए आवेदन मांगे थे। उस समय करीब 1000 विद्यार्थियों ने बड़े चाव से फॉर्म भरे थे और हर छात्र से फीस के रूप में लगभग 2000 रुपये लिए गए थे। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही के चलते कई साल बीत जाने के बाद भी एंट्रेन्स एग्जाम (प्रवेश परीक्षा) नहीं कराई जा सकी। अब नई प्रशासनिक टीम के आने से इस अटकी हुई प्रक्रिया के जल्द पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है।

सीधे पीएचडी में एडमिशन

खास बात यह है कि इस बार एडमिशन की रेस में दौड़ रहे छात्रों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों का सीधा फायदा मिलने वाला है। नए नियमों और प्रावधानों के लागू होने से छात्रों को पीएचडी में एंट्री पाने के लिए एक्स्ट्रा मौके मिलेंगे। अब यूजीसी नेट (UGC NET) क्वालिफाई कर चुके छात्र भी इसके जरिए सीधे पीएचडी में एडमिशन ले सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को अलग से होने वाली प्रवेश परीक्षाओं का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और पूरी चयन प्रक्रिया बेहद साफ-सुथरी और सरल हो जाएगी।

शिक्षा जगत से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि मत्स्य यूनिवर्सिटी में पीएचडी दोबारा शुरू होने से क्षेत्र में रिसर्च और पढ़ाई-लिखाई के माहौल को एक नया बूस्ट मिलेगा। इससे न सिर्फ होनहार और टैलेंटेड युवाओं को सीधे बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स से जुड़ने का मौका मिलेगा, बल्कि यूनिवर्सिटी के भीतर भी एक मजबूत रिसर्च कल्चर तैयार होगा। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब अलवर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के छात्र-छात्राओं को पीएचडी करने के लिए जयपुर, दिल्ली या दूसरे बड़े शहरों के महंगे चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्हें अपने ही गृह जिले में बेहद कम खर्च पर उच्च शिक्षा के सबसे बेहतरीन और विश्वस्तरीय अवसर मिल सकेंगे।

ये भी पढ़ें

सरिस्का में रोमांच: बफर जोन में एक साथ दिखे 5 टाइगर, वन विभाग ने जारी किया ‘हाई अलर्ट’
Published on:
20 May 2026 12:08 pm
Also Read
View All