
नीमराणा। कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नीमराणा क्षेत्र के मोहलड़िया गांव के बिचपुरी रोड स्थित एक कबाड़ गोदाम में शुक्रवार शाम को भीषण आग लग गई। गोदाम में काम करने वाले कई मजदूर आग में फंस गए। इनमें से 7 साल की बालिका व 3 मजदूर जिंदा जल गए। रात करीब 10 बजे तक 4 शवों को नीमराणा के सरकारी अस्पताल में पहुंचाया जा चुका था। इस गोदाम में बड़ी मात्रा में सेंट (परफ्यूम) की खाली शीशियां व अन्य कबाड़ भरा हुआ था।
गोदाम परिसर में प्लास्टिक दाने की फैक्टरी भी है। आग की लपटें फैक्टरी तक भी पहुंच गईं। गोदाम व फैक्टरी का मालिक एक ही है, जो कोलीला गांव का निवासी बताया जा रहा है। गोदाम व फैक्टरी के इस परिसर में मजदूरों के बच्चे खेल रहे थे। इनमें से 7 साल की बालिका की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्लास्टिक दाने की फैक्टरी में आग की वजह से ब्लास्ट भी हुआ। यह इलाका आयात-निर्यात संवर्धन पार्क (ईपीआइपी) से सटा हुआ है। गोदाम के समीप ही एक हाउसिंग सोसायटी भी है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही कबाड़ गोदाम में लगी, तो वहां काम कर रहे मजदूर बाहर की तरफ भागे, लेकिन गेट पर ट्रक फंसा हुआ था। आग लगते ही इस ट्रक का चालक जान बचाकर भाग गया। आग की लपटों में घिरे ट्रक की वजह से मजदूर गेट तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद मजदूर प्लास्टिक दाने की फैक्टरी की दीवार की तरफ भागे, लेकिन दीवार ऊंची होने के कारण उसे फांद नहीं सके और आग की लपटों में घिर गए।
प्रत्यक्षदर्शियाें का कहना है कि गोदाम में अभी भी कई मजदूर फंसे हुए हैं। मौके पर बचाव कार्य जारी है। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। एफएसएल टीम को बुला लिया गया। रात को कोटपूतली-बहरोड़ जिला कलक्टर अर्पणा गुप्ता, एसपी सतवीर सिंह, नीमराणा एएसपी सुरेश खींची, डीएसपी चारुल गुप्ता, नीमराणा एसडीएम समेत 6 थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। नीमराणा, जापानी जोन व घीलोठ दमकल केंद्रों से करीब छह दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
मौके पर मौजूद पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि अभी मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है। मौतों का आंकड़ा भी बढ़ सकता है। शवों के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं। यह पता नहीं चल सका है कि आग किन कारणों से लगी और घटना के समय कबाड़ गोदाम व प्लास्टिक दाने की फैक्टरी में कितने मजदूर काम कर रहे थे। प्रारंभिक जानकारी मिल रही है कि गोदाम व फैक्टरी में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जिसकी वजह से आग तेजी से फैली।