अलवर

Deemed Forest Land : डीम्ड फॉरेस्ट पर एनजीटी सख्त, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब, सख्त आदेश से पर्यावरण प्रेमी खुश

Deemed Forest Land : डीम्ड फॉरेस्ट पर एनजीटी ने सख्ती दिखते हुए राजस्थान सरकार से जवाब मांगा। कहा इस प्रक्रिया एक माह में पूरी करें। एनजीटी के आदेश से पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर है। जानें डीम्ड फॉरेस्ट क्या होता है?

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May 02, 2026
जयपुर में बस्सी तहसील के पड़ासोली गांव की वह जमीन जिसे बेचा गया है। फोटो पत्रिका

Deemed Forest Land : अलवर. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार के रजिस्ट्रार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डीम्ड फॉरेस्ट लैंड के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है या नहीं। यदि जारी नहीं किया है, तो इसकी प्रक्रिया एक माह में पूरी करनी होगी। एनजीटी के इस आदेश के बाद पर्यावरण प्रेमी खुश हैं, क्योंकि प्रदेशभर में लाखों हेक्टेयर भूमि डीम्ड फॉरेस्ट की है, जो अब वन विभाग के पास आएगी। तमाम ऐसी जमीनों पर प्रदेशभर में आलीशान होटल, रेस्टोरेंट से लेकर कई कमर्शियल प्रतिष्ठान खड़े हो गए हैं। जिन पर एनजीटी के नए आदेश से एक्शन हो सकता है।

एनजीटी में नाहरगढ़ वन एवं वन्यजीव संरक्षण समिति की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि जयपुर की बस्सी तहसील के पड़ासोली गांव निवासी बब्बू पालीवाल, अमित जैन आदि की जमीन खसरा नंबर 306, 307/2, 45, 310, 276 व 277 बीड़ व बंजड़ श्रेणी में आती है, जो डीम्ड फॉरेस्ट के नाम दर्ज होनी चाहिए, लेकिन यह करीब 150 बीघा जमीन जयपुर के ही एक बड़े होटल व्यवसायी को बेच दी गई। तहसील स्तर से इसकी रजिस्ट्री हुई है। ऐसे में यह रजिस्ट्री निरस्त करते हुए जमीन वन विभाग को दी जाए।

याचिका में यह भी कहा गया कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी यही स्थिति है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने डीम्ड फॉरेस्ट की जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाते हुए इस जमीन को वन विभाग को सौंपने के आदेश दिए हैं। समिति की ओर से कपूर समिति की रिपोर्ट भी एनजीटी के समक्ष पेश की गई। इस पर जस्टिस शिव कुमार सिंह ने राज्य सरकार से पूछा है कि एक माह में यह बताया जाए कि ऐसी जमीनों का नोटिफिकेशन किया है या नहीं, यदि नहीं किया, तो कारण बताएं।

क्या है डीम्ड फॉरेस्ट?

डीम्ड फॉरेस्ट (मानित वन) भूमि उन क्षेत्रों को संदर्भित करती है, जो आधिकारिक सरकारी या राजस्व रिकॉर्ड में औपचारिक रूप से वन भूमि के रूप में दर्ज नहीं हैं, लेकिन वास्तव में वे वन जैसी विशेषताएं लिए हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, इन जमीनों पर वन संरक्षण कानून लागू होता है और इनकी खरीद-फरोख्त या गैर-वानिकी उपयोग (जैसे रिसॉर्ट-होटल) के लिए वन विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य है। डीम्ड फॉरेस्ट में गैर मुमकिन पहाड़, ओरण, बीड़, रोंध और राजस्थान में सामुदायिक वन भूमि देव वन आते हैं।

नहीं हुई है इस जमीन की रजिस्ट्री - तहसीलदार

आंधी की तहसीलदार प्रांजल कंवर का कहना है कि इस जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई है। एसडीएम जमवारामगढ़ ललित मीणा ने भी यही कहा, लेकिन जमीन के मालिक बब्बू पालीवाल ने कहा कि जमीन की रजिस्ट्री हो गई है।

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Published on:
02 May 2026 09:12 am
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