अलवर

अलवर शहर के नालों का जहरीला पानी गाजूकी नदी में जा रहा, प्रदूषण में है अलवर शहर के यह हाल

https://www.patrika.com/alwar-news/
2 min read
Aug 12, 2018
Polluted Water Of Alwar City Entering In Gazuki River
अलवर शहर के नालों का जहरीला पानी गाजूकी नदी में जा रहा, प्रदूषण में है अलवर शहर के यह हाल

अलवर. जब अलवर शहर से निकल रहे गंदे पानी में जहरीले झाग आ रहे हैं तो अलवर के औद्योगिक क्षेत्र के क्या हालात होंगे अनुमान लगाने के लिए काफी हैं। यही पानी गाजूकी नदी में जा रहा है। नदी से जमीन में भी पानी जहरीला होने का असर धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। कारखाने, दुकानें व बायोवेस्ट को लेकर नियम कायदे तो हैं ही और हाईकोर्ट के आदेश भी हैं। इसके बावजूद जहरीला पानी नालों में छोड़ा जा रहा है।

राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो चौकाने वाले हालात सामने आए। अलवर शहर के गंदे नालों का पानी में कई तरह के रसायन व तेजाबयुक्त पानी पहुंच रहा है। बैट्रियों का लैड व तेजाब तो खुले में नालों में उड़ेला जाता है। इसके अलावा बायोवेस्ट भी नालों में फेंक दिया जाता है। ऐसा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। दिन भर नालों के पानी में झाग आते रहते हैं। यही पानी तूलेड़ा से होते हुए गाजूकी नदी तक पहुंचता है। अब कई जगहों पर नाला कच्चा है तो गंदा पानी खेतों में जा रहा है। शुरूआत में गंदा पानी फसल के लिए फायदेमंद लगता है लेकिन बाद में इसका असर जमीन पर पड़ता है जो धीरे-धीरे जमीन को बंजर बनाता है।

पानी का परिशोधन नहीं हो रहा

अब भी शहर का सीवरेज का पानी भी नालों में जा रहा है। पानी का परिशोधन भी नहीं हो रहा हे। खेतों में सफेल परत बिछी जा रही है। हवा के साथ सूखकर और उडकऱ यह जहय रास्तों व आसपास के घरों तक पहुंच रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल भी सोया हुआ है।

अदालत के ये आदेश, पालना नहीं

हाईकोर्ट ने पिछले साल अगस्त में प्रदूषण नियंत्रण मण्डल को निर्देश दिए कि एनओसी व निर्धारित प्रबंधन के बिना संचालित फैक्ट्रियों को तत्काल बंद कराएं। कभी कभार नोटिस देने की कार्रवाई के आगे कुछ नहीं होता है।
एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सात मार्च 2003 को सरकार ओर रीको को कारखानों का दूषित पानी बाहर आने से रोकने के लिए परिशोधन प्लांट लगाने के निर्देश दिए।

जनता के लिए यह मुसीबत

कैमिकल युक्त पानी वायु के साथ भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है।प्रदूषित पानी के लगातार बहाव वाले क्षेत्र में करीब आधा किलोमीटर का दायरा प्रभावित होता है।पानी के पुनर्चक्रण में चार से पांच माह लगते हैं लेकिन दोहन ज्यादा हो तो प्रक्रिया पूरी नहीं होती और प्रदूषित पानी निकलने लगता है।तत्काल फसल के लिए लाभदायक नजर आता है। लेकिन भविष्य में जमीन के लिए खतरनाक होता है।

शहर में ध्वनि प्रदूषण मापने का कोई स्थाई जगह उपकरण नहीं लगाए गए हैं। इसका एक मीटर होता है जिससे दीपावली पर्व पर तथा समय-समय पर ध्वनि प्रदूषण की जांच करते हैं। यह सही है कि अलवर में ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है।
ओपी गुप्ता, क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अलवर।

Published on:
12 Aug 2018 02:20 pm