
राजगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त कर्मचारी संघ शाखा की ओर से अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। कस्बे के बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPIO) कार्यालय पर बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं इकट्ठा हुईं।
यहां अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए उन्होंने प्रदर्शन किया। इसके बाद सभी कर्मचारी रैली के रूप में कस्बे के प्रमुख बाजारों और मुख्य मार्गों से होते हुए उपखंड कार्यालय (SDM ऑफिस) पहुंचे। रैली के दौरान कार्यकर्ताओं का आक्रोश साफ देखने को मिला, जहां उन्होंने सरकार से अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की। एसडीएम की अनुपस्थिति में उनके निजी सहायक (PA) को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा गया।
कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से वे अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:
नियमितीकरण और स्थाई रोजगार: सभी मानदेय कर्मियों को स्थायी कर राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
मानदेय में बढ़ोतरी: जब तक स्थाई नहीं किया जाता, तब तक महंगाई के अनुपात में सम्मानजनक मानदेय बढ़ाया जाए।
पेंशन और सामाजिक सुरक्षा: सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए पेंशन और ग्रेच्युटी की व्यवस्था की जाए।
काम का बोझ कम हो: मोबाइल ऐप और ऑनलाइन एंट्री के नाम पर मिलने वाले अतिरिक्त मानसिक तनाव और काम के दबाव को कम किया जाए।
एसडीएम कार्यालय पर ज्ञापन सौंपने के बाद संघ के स्थानीय पदाधिकारियों ने मीडिया को बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्राउंड लेवल पर सरकार की हर योजना को जनता तक पहुंचाती हैं। चाहे वह बच्चों का पोषण हो या गर्भवती महिलाओं की देखभाल, वे पूरी ईमानदारी से काम करती हैं।
इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय मिलता है और सामाजिक सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है। कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस 11 सूत्रीय मांग पत्र पर जल्द ही कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और राज्य सरकार की होगी।