अलवर

Pregnant Women Screening: प्रसूताओं की मौत के बाद एक्शन में स्वास्थ्य विभाग, शुरू हुआ बड़ा अभियान

कोटा, भीलवाड़ा सहित चार जिलों में गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं की मौत के बाद राजस्थान स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। विभाग ने बुधवार से पांच दिवसीय सघन स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है। इसके तहत अब हर गर्भवती महिला की समय पर जांच कर उनका पूरा हेल्थ रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा।
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Jul 16, 2026
Pregnant Women Screening
अ​भियान के तहत महिला की जांच करती चिकित्सक (फोटो - पत्रिका)

कोटा, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा और बीकानेर में गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं की मौत के मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। इसी के तहत अलवर जिले में बुधवार से पांच दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया गया है। अभियान का उद्देश्य सभी गर्भवती महिलाओं की समय पर स्वास्थ्य जांच कर संभावित जोखिमों की पहचान करना और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है।

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी

अभियान के दौरान जिले की सभी गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रसव पूर्व आवश्यक जांच, रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन, शुगर सहित अन्य स्वास्थ्य मानकों का रिकॉर्ड तैयार कर नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा। जिन महिलाओं में किसी प्रकार का स्वास्थ्य जोखिम मिलेगा, उन्हें तत्काल उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को गंभीरता से लेते हुए फील्ड स्तर पर कार्यरत आशा सहयोगिनी, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की जिम्मेदारियां तय की हैं। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी गर्भवती महिला जांच से वंचित नहीं रहे। विभाग का मानना है कि समय पर जांच और निगरानी से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। अभियान की नियमित मॉनिटरिंग भी जिला स्तर पर की जाएगी।

चार एएनसी जांच

अलवर सीएमएचओ डॉ. डॉ. योगेंद्र कुमार शर्मा ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का गर्भधारण के प्रथम 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण कर सभी सूचनाएं समय पर पीसीटीएस पोर्टल पर दर्ज करें। स्क्रीनिंग का कार्य आशा वर्कर, एएनएम एवं सीएचओ के माध्यम से कराया जाएगा। आरसीएचओ डॉ. मंजू शर्मा ने बताया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की कम से कम चार एएनसी जांच कराई जाएंगी। जांच के दौरान रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन, मूत्र परीक्षण, रक्त शर्करा सहित अन्य आवश्यक जांचें कर उनका रिकॉर्ड रखा जाएगा।


हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर रहेगी विशेष निगरानी

आरसीएचओ डॉ. शर्मा ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) के लिए अलग ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। प्रत्येक एचआरपी महिला की नामवार सूची उप स्वास्थ्य केंद्र से जिला स्तर तक उपलब्ध रहेगी। मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना का 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक विश्लेषण एवं नियमानुसार मैटरनल डेथ रिव्यू कराया जाएगा।

साथ ही, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और मातृ मृत्यु की साप्ताहिक समीक्षा कर लापरवाही मिलने पर जवाबदेही तय होगी। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में जीवनरक्षक दवा, रक्त की उपलब्धता, प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर एवं नवजात पुनर्जीवन उपकरणों को पूर्ण रूप से कार्यशील रखने तथा सुरक्षित मातृत्व सेवाओं के लिए जारी एसओपी और राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

Updated on:
16 Jul 2026 11:46 am
Published on:
16 Jul 2026 11:46 am