
स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा से ठीक पहले जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आयोग के दिशा-निर्देशों पर तेजी से अमल किया जा रहा है। जयपुर से ईवीएम की खेप पहुंचते ही तैयारियों ने और जोर पकड़ लिया है।
जयपुर से आई 650 ईवीएम मशीनों की प्रथम चरण की तकनीकी जांच (First Level Checking - FLC) का काम भी पूरा कर लिया गया है। चुनाव आयोग की ओर से आई विशेष तकनीकी टीम ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और जिले के बड़े अधिकारियों के सामने इन मशीनों की बारीकी से पड़ताल की।
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी ईवीएम मशीनों को कड़ी सीलबंद सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में रखवा दिया गया है। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर 24 घंटे कड़ा पहरा तैनात कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मतदान की तारीख तय होने और पोलिंग बूथों पर भेजने से ठीक पहले एक बार फिर इन मशीनों का री-चेकिंग ट्रायल किया जाएगा, ताकि वोटिंग के दौरान कोई तकनीकी खराबी न आए।
ईवीएम के साथ-साथ आयोग की तरफ से वीवीपैट (VVPAT) मशीनें भी जिले को आवंटित कर दी गई हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि मशीनों की सुरक्षा और रख-रखाव के लिए एसओपी (SOP) का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है।
इस बार चुनाव में मतदाता दो अलग-अलग तरीकों से अपने प्रतिनिधि चुनेंगे।
EVM से मतदान: जिले में जिला परिषद के 49 पार्षदों और नगर निगम के 65 वार्ड पार्षदों का चुनाव सीधे ईवीएम मशीन के जरिए होगा।
बैलेट पेपर से चुनाव: वहीं दूसरी तरफ, ग्रामीण इलाकों में पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान पुराने तरीके यानी बैलेट पेपर (मतपत्र) से ही संपन्न कराया जाएगा।
अलवर जिले की कुल 16 पंचायत समितियों में चुनाव कराने को लेकर प्रशासन ने खाका तैयार कर लिया है। अधिकारियों का दावा है कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। पोलिंग बूथों का चिह्नीकरण, संवेदनशील सेंटर्स की लिस्टिंग और कर्मचारियों की ट्रेनिंग का शेड्यूल भी जल्द जारी कर दिया जाएगा। प्रशासन का पूरा फोकस इस बात पर है कि आम जनता बिना किसी भय के शांतिपूर्ण और सुचारु माहौल में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके।
जयपुर से ईवीएम भिजवाई गई हैं, जिनकी एफएलसी हो गई है। यह कड़ी सुरक्षा में रखवाई गई हैं - योगेश डागुर, एडीएम प्रथम