Jaisamand dam: अलवर शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए बांध के ऊपर 25 पानी की बोरिंग लगाई गई है, जो दिनरात चल रही है। इनसे हजारों लीटर पानी को निकाला जा रहा है।
Alwar News: अलवर जिले के सबसे बड़े बांध जयसमंद का पानी तेजी से गायब हो रहा है। तीन साल बाद इस बांध का जलस्तर करीब 12 फीट पहुंच गया था, लेकिन अब केवल 4.9 फीट पानी बांध में शेष रह गया है। एक सप्ताह में पानी का जलस्तर 2 से 3 फीट तक गिर चुका है। सिलीसेढ़ में एक इंच की चादर चलने के बाद भी जयसमंद के पानी का जलस्तर गिरने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह भी चर्चा है कि अगर इसी तरह जलस्तर गिरता रहा तो आने एक-दो महीने में ही बांध फिर से सूख जाएगा।
बांध का तेजी से गायब होने के पीछे सबसे बड़ी वजह आसपास संचालित बोरिंग को माना जा रहा है। भूगोल प्रोफेसर महेन्द्र जाजोरिया ने बताया कि बांध की तलहटी कई वर्षों से सूखी हुई थी, कुछ पानी इसे आर्द्र करने में चला गया। बांध के आसपास किसानों की एक हजार से ज्यादा बोरिंग लगी हुई है और समय किसान प्याज की रोपाई के लिए पानी का उपयोग कर रहा है। अलवर शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए बांध के ऊपर 25 पानी की बोरिंग लगाई गई है, जो दिनरात चल रही है। इनसे हजारों लीटर पानी को निकाला जा रहा है।
अलवर जिले में औसत बारिश 555 मिमी के मुकाबले अब तक 970 मिमी से ज्यादा बारिश हो चुकी है, लेकिन 12 बांध ऐसे हैं जिनमें पानी की आवक नहीं हुई। जिले में सिंचाई विभाग के 22 में 9 बांधों में ही पानी की आवक हुई है। सिलीसेढ़ और मानसरोवर में पिछले एक माह से चादर चल रही है। सबसे बड़ी नदी रुपारेल और साहबी में भी पानी चला है। उधर, जिला परिषद के 105 बांध में ज्यादातर सूखे हैं।
जयसमंद बांध की कुल गहराई 23.1 फीट है
इसकी पानी स्टोरे की क्षमता 952 मिलियन क्यूबिक फीट है
इस बार बारिश में इसका उच्चतम स्तर 12 फीट रहा
वर्तमान में 4.9 फीट रह गया जलस्तर
बांध में घटते पानी के स्तर को लेकर हम चिंतित हैं। इसके लिए भूजल विभाग से जानकारी ली जा रही है। साथ ही इसी प्रकार पानी का स्तर गिरता रहा तो जूलॉजिकल सर्वे करवाया जाएगा।