Farmer success story : अलवर शहर के मालवीय नगर निवासी काडूराम ने सेवानिवृत्ति के बाद खेती-बाड़ी में नवाचार किया और जिले के किसानों के लिए मिसाल बन गए। काडूराम करीब 13 साल पहले एक कॉलेज में लैब असिस्टेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए।
अलवर। शहर के मालवीय नगर निवासी काडूराम ने सेवानिवृत्ति के बाद खेती-बाड़ी में नवाचार किया और जिले के किसानों के लिए मिसाल बन गए। काडूराम करीब 13 साल पहले एक कॉलेज में लैब असिस्टेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए। वे अपने आइएएस बेटे की प्रेरणा से पिछले तीन साल से खेती-बाड़ी से जुड़कर नवाचार कर रहे हैं। खेतों में शिमला मिर्च की लाल, पीली व हरी वैरायटियां उगाने के साथ ही चेरी टमाटर की पैदावार भी कर रहे हैं।
काडूराम उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो सेवानिवृत्ति के बाद अपना समय कुछ अच्छे काम के लिए देना चाहते हैं। काडूराम बताते हैं कि मेरा बेटा अलीगढ़ में नगर आयुक्त के पद पर कार्यरत है।
उसने सोशल मीडिया पर भीलवाड़ा के एक किसान की रील देखी, जिसमें किसान ने शिमला मिर्च की अलग-अलग किस्में उगाई हुई थीं। मेरे बेटे ने उस किसान से संपर्क किया, तो उसने भीलवाड़ा बुलाया और पूरा प्रोजक्ट दिखाया, जो उसे बहुत पसंद आया। इसके बाद उसने मुझे भी इस काम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
काडूराम बताते हैं कि हमारी किथूर गांव में करीब 15 बीघा जमीन है। खेती-बाड़ी हमारा परंपरागत पेशा है। खेत पर पॉली हाउस पर खीरा पैदा होता था, साथ ही गेंहू, सरसों की फसल ही उगाते हैं। बेटे ने कहा कि अब कुछ नई पैदावार करनी चाहिए, हमने राइल एनोवेशन सोल्यूशन अहमदाबाद से संपर्क किया और शिमला मिर्च की पैदावार के लिए प्रोजेक्टर लगाया। अब हमारे खेतों में अलग-अलग रंगों की शिमला मिर्च पैदा हो रही है। पहले अलवर में ही मांग कम थी, लेकिन अब अलवर में भी लाल, पीली शिमला मिर्च की खपत खूब हो रही है। मिर्च मार्केट में 150 रुपए किलो बिक रही है।
काडूराम बताते हैं कि पॉली हाउस में चेरी टमाटर की पैदावार भी खूब हो रही है, जिसे अलवर के अलावा दिल्ली, जयपुर सहित दूसरे शहरों में भेजे रहे हैं। सामान्य टमाटर जहां 10 से 20 रुपए किलो के भाव में बिकते हैं, वहीं चेरी टमाटर 150 रुपए से 200 रुपए तक बिक रहे हैं। इसमें सामान्य टमाटर से ज्यादा खटास होती है। क्वालिटी भी बेहतर है। इस पैदावार से एक ओर जहां समय का बेहतर सरुपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ कम लागत में अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। वे बताते हैँ कि शिमला मिर्च व चेरी टमाटर की देखभाल के लिए कृषि क्षेत्र से जुडे़ विशेषज्ञ रखे हुए हैं, बहुत से किसानों को रोजगार भी मिल रहा है। पैदावार के लिए जैविक खेती को अपनाते हैं।
अब काडूराम कृषि व उद्यान विभाग की ओर से लगाई जाने वाली प्रदर्शनियां व मेलों में भाग लेकर अलवर का गौरव बढ़ा रहे हैं। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण आत्मा परियोजना की ओर से इसी साल फरवरी माह में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेकर काडूराम ने अलग-अलग श्रेणियों में प्रथम व द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। पिछले साल भी आत्मा परियोजना के तहत पुरस्कार के लिए चयन किया गया था।