अलवर

ये मौत बांटती सड़कें, तथ्यों को देखकर आप भी कह उठेगें ये हादसे नहीं मर्डर हैं साहेब

सड़क हादसों पर नहीं लग रही प्रभावी रोक
2 min read
Jul 16, 2018
Road accident increase in alwar
ये मौत बांटती सड़कें, तथ्यों को देखकर आप भी कह उठेगें ये हादसे नहीं मर्डर हैं साहेब।

अलवर जिला सड़क हादसों के मामले में प्रदेश में दूसरे नम्बर पर है। दरअसल, अलवर से कई हाइवे और नेशनल हाईवे गुजरते हैं। इसके अलावा यहां 150 से अधिक एक्सीडेंटल प्वाइंट हैं जिन पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। इसके बावजूद यहां न संकेतक लगे हैं और न डिवाइडर।

रोकथाम के लिए गठित की सैल

बढ़ती सड़क दुघर्टनाओं के बाद अलवर में पुलिस ने जून माह में हादसों की रोकथाम के लिए एक पृथक सेल गठित की। इसका नोडल अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण को बनाया गया। जिनकी सहायता के लिए एक पुलिस निरीक्षक को लगाया गया। पुलिस निरीक्षक का कार्य जिले के एक्सीडेंटल प्वाइंटों का विजिट कर हादसों के कारण का पता लगा सुधारात्मक कार्रवाई करना तय किया गया। सेल के गठन से हादसों पर कितनी रोक लगी, इसका आंकलन होना बाकी है।

हादसों के मुख्य कारण

आमतौर पर हादसे का कारण वाहन चालक की गलती मानी जाती है। हकीकत ये है कि हादसे के कई अन्य कारण भी होते हैं। इनमें सड़क का खराब होना, सड़कों से व्हाइट लाइन का गायब होना, संकेतकों का अभाव, डिवाइडर का नहीं होना, सड़क का संकरा एवं ट्रेफिक का अधिक होना आदि हैं। ये ऐसे कारण हैं, जिनमें वाहन चालक से ज्यादा हादसे का जिम्मेदार अफसर व प्रशासन होते हैं।

कठोर सजा का नहीं प्रावधान

सड़क हादसों में आमतौर पर आरोपी के खिलाफ धारा 304 ए में केस दर्ज होता है। मामले में पुलिस आरोपित को गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन यह जमानती अपराध होता है। दोष सिद्ध होने पर दो साल की जेल या जुर्माना अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुघर्टनाओं के मामले में यह सजा अपर्याप्त है।

ये हैं कुछ प्रमुख एक्सीडेंटल पॉइन्ट्स

जिले में पुलिस ने 157 स्थानों को एक्सीडेंटल प्वाइंट के रूप में चिह्नित किया है, लेकिन इनमें से कई प्वाइंट बेहद संवेदनशील हैं। बख्तल की चौकी सबसे ऊपर है। वर्ष 2013,14,15 में इस स्थान पर 196 दुघर्टनाएं हुईं, जिनमें 73 लोगों की मौत व 122 लोग घायल हुए। इसके अलावा भगतसिंह सर्किल, सूर्य नगर मोड, गैलपुर, सामोला चौक, जागूवास चौक, झझारपुर, मिठीयाबास, देहमी, सामदा गेट, कटीधाटी तिराहा, तिजारा रोड, माचाडी चौराहा, चिकानी बस स्टैण्ड, होंडा चौक , माचा ओदरा, कलसाड़ा आदि हैं। इन स्थानों में से कुछ पर पिछले साल हादसों की रोकथाम के लिए संकेतक आदि लगवाए गए। इससे हादसों में कुछ कमी आई, लेकिन डिवाइडर आदि के अभाव में हादसों पर प्रभारी रोक नहीं लग सकी।

वर्ष 2015 हादसे 1367 मौत 600 घायल 938
वर्ष 2016 हादसे 1376 मौत 563 घायल 971
वर्ष 2017 हादसे 1237 मौत 574 घायल 872

पुलिस की ओर से इनकी रोकथाम के लिए अलग से सैल गठित की गई है। वाहन चालकों से भी समय-समय पर समझाइश का अभियान चलाया जाता है। वैसे हादसों पर रोक के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। सभी विभागों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
राहुल प्रकाश, जिला पुलिस अधीक्षक अलवर

Updated on:
16 Jul 2018 10:16 am
Published on:
16 Jul 2018 09:32 am