अगस्त में शुरू होने वाले भर्तृहरि मेले में इस बार श्रद्धालुओं को पहुंचने में परेशानी नहीं होगी। पीडब्ल्यूडी कुशालगढ़ मोड़ से थैंक्यू बोर्ड तक सड़क बनाने जा रहा है। साथ ही, जर्जर पुलिया भी बनाई जाएगी। ऐसे में श्रद्धालुओं की राह आसान होगी।
अलवर। अगस्त में शुरू होने वाले भर्तृहरि मेले में इस बार श्रद्धालुओं को पहुंचने में परेशानी नहीं होगी। पीडब्ल्यूडी कुशालगढ़ मोड़ से थैंक्यू बोर्ड तक सड़क बनाने जा रहा है। साथ ही, जर्जर पुलिया भी बनाई जाएगी। ऐसे में श्रद्धालुओं की राह आसान होगी। सड़क व पुलिया निर्माण की अनुमति सरकार से मिल गई है। पीडब्ल्यूडी अब टेंडर लगाने की तैयारी में है। सड़क निर्माण पर 20 करोड़ रुपए व पुलिया के काम पर 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
पिछले साल भर्तृहरि मेले में सड़क की जर्जर स्थिति से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा था। बारिश के मौसम में भर्तृहरि पुलिया बमुश्किल वाहनों का भार झेल पाई। श्रद्धालु मुश्किल से भर्तृहरि धाम तक पहुंचे। सड़क व पुलिया की स्थिति सामने रखी, तो जनप्रतिनिधियों की आंखें खुलीं। उन्होंने सरकार को प्रस्ताव भेजकर बजट घोषणा में मंजूरी दिलाई।
उसके बाद सड़क व पुलिया की डीपीआर पीडब्ल्यूडी ने वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजी, जिसे हरी झंडी मिल गई। अब टेंडर के बाद जून में काम शुरू करवाने की तैयारी है। इससे आसपास के गांवों के लोग भी खुश हैं। क्योंकि सड़क के धूल के चलते वह परेशानी झेल रहे थे।
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन अल्का व्यास ने बताया कि कुशालगढ़ से थैंक्यू बोर्ड तक सड़क निर्माण व पुलिया का कार्य जल्द शुरू होगा। इसके टेंडर किए जाएंगे।
इधर, विज्ञान नगर व शालीमार नगर के पास बनाए जा रहे प्रवेशद्वार का विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को जनता यूआइटी पहुंची, लेकिन अधिकारी नहीं मिले। उन्होंने ज्ञापन कार्यालय में दिया। लोगों ने कहा कि प्रवेशद्वार के नीचे पानी की राइजिंग लाइन आ गई, जिसकी सप्लाई कटोरी वाला तिबारा तक है। जलदाय विभाग से लेकर रिडकोर भी प्रवेशद्वार बनाने के लिए बैकडोर से मना कर रहे हैं, लेकिन यूआइटी यहीं बनाने पर तुली है, जबकि इस प्रवेशद्वार को आगे-पीछे किया जा सकता है।
पुरुषार्थी समिति व शालीमार सोसायटी के पदाधिकारियों के अलावा जनता ने कहा कि इस मामले को लेकर जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया गया। उन्होंने मामला सतर्कता में भेज दिया है। इसके अलावा वन राज्य मंत्री संजय शर्मा से भी मिले तो उन्होंने भी कहा है कि प्रवेशद्वार कहीं भी बना सकते हैं, फिर भी यूआइटी उसी जगह पर प्रवेशद्वार क्यों बना रही है। घुमाव में प्रवेशद्वार बनने से दो वार्डों की जनता जाम से परेशान होगी। पानी की लाइन बदलने से लेकर अन्य कार्य करने होंगे। यूआइटी एक्सईएन अशोक मदान का कहना है कि प्रवेशद्वार के जगह चयन को लेकर उच्चाधिकारियों से बात की जा रही है। बिजली की लाइन शिफ्टिंग का कोई इश्यू है, उसे हल करते हुए जल्द निर्णय लिया जाएगा। हमारा उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं है।