
अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व सेंचुरी से 1 से 10 किमी के दायरे में चल रहीं खानों को लेकर एनजीटी नई दिल्ली में अवमानना केस दायर किया गया है। इन खानों को न तो सरिस्का प्रशासन बंद करवा पाया और न ही खान विभाग। पूर्व में 8 अफसरों को नोटिस दिए गए, लेकिन एक्शन नहीं हुआ।
सरिस्का सेंचुरी से 1 से 10 किमी के दायरे में वही खानें चल सकती हैं, जिनके पास राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की एनओसी होगी, लेकिन यहां चल रही अधिकतर खानों के पास एनओसी नहीं है। इस परिधि के दायरे में 22 खानें संचालित हैं, जिसमें 16 खानें ऐसी हैं, जो खान विभाग के रिकॉर्ड पर हैं और उनकी दूरी का आकलन सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए शपथ पत्र में भी है। सरिस्का के आसपास संचालित इन खानों पर एक्शन नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट कोर्ट की एडवोकेट पारुल शुक्ला ने जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी किए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब यह केस एनजीटी में धारा 25 व 26 के तहत दायर किया गया है। धारा 26 कहती है कि एनजीटी के आदेश की पालना न होने पर वह सीधे जिम्मेदारों पर एक्शन लेगा, जिसमें जुर्माने से लेकर सजा तक का प्रावधान है।
अरावली पर्वतमाला की परिभाषा, पर्यावरणीय अखंडता और संरक्षण से जुड़े मुद्दों के अध्ययन के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर कमेटी (एचपीसी) 10 अगस्त तक दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के अरावली क्षेत्र के दौरे पर है। कमेटी ने अलवर में जनसंवाद किया तो लोगों ने कहा कि इस पहाड़ को हमने या हमारे पूर्वजों ने नहीं बनाया, तो इसे खत्म करने का काम हमारा नहीं है। इसको नुकसान पहुंचाने की कल्पना कहां से आई? कमेटी को फील्ड दौरा करके लोगों से पीड़ा जाननी चाहिए। यह अरावली 64 जिलों में फैली है। यह हमारी रीढ़ है, यह खत्म तो समझें हमारी रीढ़ खत्म। गौरव गुप्ता ने कहा कि अलवर शहर अरावली से जुड़ा है। अरावली को नुकसान होते ही वन्यजीव में आबादी क्षेत्र में आएंगे। सर्किट हाउस के बाद टीम ने अलवर तहसील के मंगलवास, तेहड़पुर, उलाहेडी, राजगढ़ तहसील के बहाली, भाकरी के अलावा टहला तहसील के मल्लाणा, गोरधनपुरा, कालवाड़, खोहपालपुर व थानादुन्दपुरी गांवों का दौरा किया।