
दौलतपुरा क्षेत्र की गूगल इमेज
राजस्थान में डीम्ड फॉरेस्ट की जमीन को लेकर नियम-कायदों के बीच एक बड़ा ‘खेल’ सामने आया है। अलवर के टहला क्षेत्र में जिस बंजड़ और गैर मुमकिन पहाड़ की जमीन को वन क्षेत्र के संरक्षण के दायरे में होना चाहिए, वहां होटल खड़े हो गए। वहीं जयपुर के आंधी क्षेत्र के दौलतपुरा में करीब 81 हेक्टेयर जमीन रीको के हवाले कर दी गई।
इस जमीन की कीमत रीको ने 22 करोड़ प्रशासन को चुकाई है और अब इस जमीन पर उद्योग स्थापना के लिए 2 लाख वर्ग मीटर जमीन की नीलामी की तैयारी चल रही है। इस पर सवाल खड़े हो गए कि डीम्ड फॉरेस्ट की जमीन वन विभाग के नाम न होकर रीको के नाम कैसे कर दी गई? इसको लेकर सरकार के पास पत्र भेजकर ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं।
राजगढ़ क्षेत्र की टहला तहसील के गांव राजडोली में सरिस्का की एनओसी के बिना बंजड़ भूमि पर होटल बना दिया गया। साथ ही सिवायचक जमीन पर भी कब्जा है। इसी तहसील के ग्राम तालाब में पहाडि़यों के बीचों-बीच होटल चल रहा है। होटल संचालक ने 0.50 हेक्टेयर गैर मुमकिन पहाड़ की जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है।
यह जमीन डीम्ड फॉरेस्ट के चलते वन विभाग के नाम होनी चाहिए थी, लेकिन यहां कब्जा है। गांव कूंडला में भी 0.75 हेक्टेयर जमीन बंजड़ है, जिस पर होटल चल रहा है। इसी जमीन के खसरा नंबर 44 के कुल रकबा 12.90 हेक्टेयर में से 0.25 हेक्टेयर पर अतिक्रमण है, जो गैर मुमकिन पहाड़ व सिवायचक है। गांव खोह में भी वन विभाग की भूमि पर कब्जा कर होटल चलाया जा रहा है। इन सभी ने सरिस्का से कोई एनओसी नहीं ली है।
जयपुर की आंधी तहसील के दौलतपुरा में खसरा नंबर 345 की 81 हेक्टेयर डीम्ड फॉरेस्ट की जमीन प्रशासन ने रीको को 22 करोड़ रुपए में बेच दी। यह राशि राजस्व के खाते में जमा हुई। इसका म्यूटेशन वन विभाग के नाम खोलने की बजाय रीको के नाम दिसंबर में कर दिया गया। इस जमीन पर रीको गैर प्रदूषणकारी इकाइयां स्थापित करेगा, जिसके लिए पूरी प्लानिंग की जा रही है।
रीको ने 2.24 लाख वर्ग मीटर एरिया कमर्शियल प्रयोग के लिए नीलाम करने का निर्णय लिया है। इसी को लेकर आपत्तियां दायर की गई हैं। कहा है कि जहां पर जंगल होना था, वहां पर अब उद्योग खड़े होंगे। इससे पूर्व एनजीटी ने विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र की करीब 2.90 हेक्टेयर जमीन को वन विभाग की जमीन माना है। इस आदेश के बाद सरकारी चूक का खामियाजा करीब 50 औद्योगिक इकाइयों के उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। यही अब रीको फिर गलती करने की तैयारी में है।
डीम्ड फॉरेस्ट लैंड में गैर मुमकिन पहाड़, गैर मुमकिन राडा, गैर मुमकिन बीहड़, बंजड़ बीड़, रूंद वाली जमीनें आती हैं। सुप्रीम कोर्ट से लेकर एनजीटी व कपूर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक इन जमीनों पर वन विभाग का हक है। इसे जंगल के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने टी.एन. गोडावर्मन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया था कि वन (फॉरेस्ट) शब्द का अर्थ उसके शब्दकोश के अनुसार लिया जाना चाहिए।
इसके दायरे में वे सभी जमीनें आएंगी जिनमें जंगल के गुण हैं, भले ही वे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हों या निजी स्वामित्व वाली हों। राज्यों को ऐसे डीम्ड वनों की पहचान के लिए विशेषज्ञ समितियां बनाने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद कपूर कमेटी का गठन हुआ और इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट अलग-अलग जगहों पर प्रस्तुत की है।
आंधी क्षेत्र के दौलतपुरा में इस जमीन का आवंटन मेरे कार्यकाल से पूर्व में हुआ है। इसके दस्तावेज जांच कर आगे की कार्रवाई करेंगे- ओपी मीणा, एसडीएम, जमवारामगढ़ जयपुर
राजगढ़ के जिन गांवों में डीम्ड फॉरेस्ट की भूमि या सरकारी जमीन पर कब्जे हुए हैं, उन पर कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। जल्द ही जमीन खाली कराई जाएंगी - सीमा मीणा, एसडीएम राजगढ़ अलवर
Updated on:
02 Oct 2026 12:42 pm
Published on:
02 Oct 2026 12:42 pm
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