
राजस्थान सरकार ने एक्शन लेने के दिए निर्देश। पत्रिका फाइल फोटो
सुशील कुमार
Clerk Recruitment 2013 Scam: अलवर। लिपिक भर्ती-2013 में फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए राज्य स्तरीय जांच टीम ने अलवर में 655 में से 302 लिपिकों की नियुक्ति को संदिग्ध माना है। टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद राजस्थान सरकार ने अलवर कलक्टर व जिला परिषद के सीईओ को आदेश दिए हैं कि इन 302 लिपिकों की सुनवाई 15 दिन में करते हुए एक्शन लें। संतोषजनक जवाब व दस्तावेज न मिलने पर इन्हें बर्खास्त करें।
नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल 200 से अधिक अधिकारियों व कार्मिकों के खिलाफ भी तीन सप्ताह में एक्शन लेकर रिपोर्ट सरकार को भेजें। साथ ही, 18 कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गई है। अलवर जिला परिषद की ओर से वर्ष 2013 में लिपिक भर्ती की गई थी। इसी भर्ती का अगला चरण वर्ष 2017 व वर्ष 2022 में पूरा हुआ। तीनों चरणों में 655 लिपिकों की भर्ती की गई थी।
राज्य स्तर पर संयुक्त आयुक्त (जांच) अनिल सोनी की ओर से पेश 73 पेज की जांच रिपोर्ट को शासन सचिव जोगाराम ने अलवर कलक्टर आर्तिका शुक्ला, जिला परिषद सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र को कार्रवाई के लिए भेजा है। आदेश दिए है कि सभी 302 कर्मचारियों को सुनवाई का मौका देकर यदि जांच रिपोर्ट के आक्षेपों का निराकरण नहीं हो, तो विभागीय नियम पूरे कर इन्हें नौकरी से 15 दिन में बर्खास्त कर दिया जाए। सबसे बड़ी अनियमितता दस्तावेजों का सत्यापन नहीं करवाना है। एक गिरोह पूरे राज्य में सक्रिय रहा, जिसने जाली कंप्यूटर प्रमाण पत्र और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार किए।
रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि ऐसे कर्मचारियों को बर्खास्त करने के आदेश वर्ष 2018 में ही दे दिए गए थे, लेकिन 8 साल तक भी जिलों ने इन आदेशों की पालना नहीं की। अलवर में वर्ष 2022 में ऐसे कई और अपात्र भर्ती कर लिए गए, जो वर्ष 2018 के सर्कुलर के अनुसार भर्ती नहीं होने चाहिए थे। शासन सचिव ने मार्च-2025 में ही जिला परिषदों को सभी कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच कर संदिग्ध कर्मियों की सूचना स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को भिजवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसमें भी कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए सीईओ से स्पष्टीकरण लिया जाए। भर्ती में व्यापक स्तर पर अनियमितता हुई। कई लोग स्थानीय कंप्यूटर सेंटर से ही अन्य राज्यों के कंप्यूटर प्रमाण पत्र लाकर ऑफ कैंपस डिग्री के आधार पर ही नौकरी लेने में कामयाब हो गए। भर्ती में लिखित परीक्षा या इंटरव्यू का प्रावधान नहीं था। केवल दस्तावेजों के आधार पर नौकरी दी गई, उनका भी सत्यापन नहीं कराया जाना ठीक वैसा है, जैसे उत्तरपुस्तिका जांचे बिना ही पूर्णांक देना।
-6 कर्मचारियों के आवेदन पत्र विभाग में उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, 3 के आवेदन पत्र संदिग्ध पाए गए हैं।
-655 में से 523 लिपिक बोनस अंक लेकर अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त हुए, लेकिन जिला परिषद ने एक भी अनुभव प्रमाण पत्र का सत्यापन नहीं कराया।
-अनुभव प्रमाण पत्र नीली स्याही से जारी हुआ होना चाहिए, लेकिन अनुभव प्रमाण पत्रों की फोटो कॉपीपर नौकरियां बांटी गई, जिससे दूसरे जिलों में अनुभव प्रमाण पत्र उपयोग में लेने का शक जताया गया है।
-अनुभव प्रमाण पत्र का उपयोग दस्तावेज सत्यापन में एक जिले में एक ही बार किया जा सकता था। इसके अलावा 144 लिपिकों दो बार अनुभव का लाभ लेने की संभावना जताई गई है।
-12 लिपिकों के अनुभव प्रमाण पत्रों को गलत बताया गया है। ये सभी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने की तारीख को संविदा सेवा में नहीं थे, जबकि इनका अनुभव प्रमाण पत्र जारी होने की तारीख तक नौकरी में होना जरूरी था।
-6 अन्य के अनुभव प्रमाण-पत्रों को भी गलत बताया गया है। इनमें से कई प्रमाण-पत्र जिला स्तर के स्थान पर राज्य स्तर से जारी हुए, जो मान्य नहीं थे।
-18 कर्मचारियों पर इसलिए मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई है, क्योंकि इनके अनुभव और कंप्यूटर सहित शैक्षणिक अवधि एक समान है। इनमें से किसी एक दस्तावेज को फर्जी बताया गया है।
-25 कर्मचारी मेरिट से बाहर के बताए गए हैं। 37 कर्मचारियों के पास निर्धारित कंप्यूटर योग्यता का अभाव बताया गया है।
-5 कर्मचारियों को कटऑफ से कम नंबर होने के बाद भी नौकरी दी गई है। वहीं, 3 कर्मचारी पहले ही बर्खास्त हो चुके हैं।
वर्ष 2022 की भर्ती में सबसे ज्यादा हो गड़बड़ी हुई, 134 में से 89 संदिग्ध कर्मी इस जांच रिपोर्ट की जद में आए हैं। इनमें से अब तक 3 बर्खास्त चुके हैं। वर्ष 2022 की भर्ती में ओबीसी विधवा महिला कोटे की कटऑफ जारी नहीं करने और नियुक्ति के 33 दिन बाद कटऑफ जारी करने को भी गलत बताया गया है। ओबीसी विधवा कोटे में तीन लोगों को बिना कटऑफ जारी किए नौकरी दी गई। रिपोर्ट में लिखा है कि आरएससीआइटी कंप्यूटर प्रमाण पत्र में वर्ष 2013 के सभी प्रमाण पत्रों में अंतिम दो डिजिट 13 है, जो संदिग्ध है। जांच रिपोर्ट में इस दौरान रहे सभी सीईओ व कलक्टर्स से स्पष्टीकरण लेने की सिफारिश की गई है।
लिपिक भर्ती में गड़बड़ी का खुलासा सबसे पहले राजस्थान पत्रिका ने 2 मई 2023 को किया था। उसके बाद एक के बाद एक कई खुलासे किए। करीब 80 लिपिकों को फर्जी बताया था। तीन वर्षों में पत्रिका ने लगातार खबरें प्रकाशित कीं। खुलासे के बाद पूरे प्रदेश में जिला कलक्टर्स को भर्ती की जांच सौंपी गई। जयपुर, भरतपुर के बाद अब अलवर जिले की जांच रिपोर्ट सामने आई है।
हाल ही में जिला परिषद की भर्ती शाखा के तत्कालीन लिपिक राजेश यादव को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा वर्ष 2022 की भर्ती में 8 अन्य अधिकारियों को भी 16 सीसीए की चार्जशीट दी गई थी।
लिपिक भर्ती की जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने जो भी आदेश दिए हैं, उसका पालन जल्द होगा। आगे की कार्रवाई शुरू करेंगे।
-सालुखे गौरव रविंद्र, सीईओ, जिला परिषद
Updated on:
08 Aug 2026 01:59 pm
Published on:
08 Aug 2026 01:59 pm
