अलवर

सरिस्का में JCB के शोर से दहशत: शावकों संग ठिकाना बदल रही बाघिन ST-2302, उठे सवाल

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व (Sariska Tiger Reserve) के अंधेरी बफर जोन में घास हटाने के नाम पर चल रही जेसीबी मशीनों से वन्यजीवों की सुरक्षा पर संकट खड़ा हो गया है। भारी मशीनों के तेज शोर और धुएं के कारण बाघिन एसटी-2302 अपने दो नन्हें शावकों के साथ लगातार अपना ठिकाना बदलने को मजबूर है।
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Updated: 26 Oct 2026, 11:28 AM IST
sariska tiger reserve
सरिस्का बफर जोन में दो शावकों के साथ एसटी 2302, फाइल फोटो

अलवर में सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर जोन अंधेरी में वनस्पति हटाने के लिए कई दिनों से चल रही जेसीबी अब वन्यजीव प्रेमियों के निशाने पर है। उनका दावा है कि जेसीबी की तेज आवाज और डीजल के धुएं से बाघिन एसटी-2302 और उसके दो शावकों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है। बाघिन के दिन में कई बार ठिकाना बदलने की बात भी सामने आई है। वन्यजीव प्रेमियों का आरोप है कि रविवार को जेसीबी बाघिन के काफी नजदीक पहुंच गई थी, जिससे उसे वहां से हटना पड़ा। हालांकि, सरिस्का प्रशासन ने जेसीबी के बाघिन के नजदीक जाने की बात से इनकार किया है।

घास हटाने के नाम पर मशीनें, वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवाल

सरिस्का प्रशासन ने पहले जूली फ्लोरा और लैंटाना जैसी आक्रामक वनस्पतियों को हटाकर दूसरी घास उगाने का अभियान चलाया था। इससे चीतल और सांभर जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलने की बात कही गई। अब इसी अभियान के तहत अंधेरी के जंगल में जेसीबी चलाई जा रही है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि इस क्षेत्र में इन वनस्पतियों की मौजूदगी और मशीनों के इस्तेमाल की जरूरत की समीक्षा होनी चाहिए। उनका दावा है कि तेज शोर से बाघिन, शावक और अन्य वन्यजीव प्रभावित हो रहे हैं।

क्या खत्म हो जाएगी अंधेरी की पहचान?

अंधेरी सरिस्का का ऐसा क्षेत्र है, जहां दिन में भी घने जंगल के कारण अंधेरा रहता है। यही इसकी विशिष्ट पहचान है और पर्यटक भी इसे देखने पहुंचते हैं। पर्यावरण प्रेमियों को आशंका है कि जेसीबी से बड़े पैमाने पर वनस्पति हटाने से जंगल की प्राकृतिक बनावट प्रभावित हो सकती है। इससे अंधेरी की पहचान पर भी असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।

वासका और छोटे जीवों के आवास पर भी चिंता

वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार, अंधेरी क्षेत्र में वासका नामक वनस्पति भी पाई जाती है, जिसका पारंपरिक रूप से खांसी संबंधी औषधियों में उपयोग होता है। उनका कहना है कि जेसीबी से इस वनस्पति के साथ कीट-पतंगों, सरीसृपों और छोटे जीवों के प्राकृतिक आवास को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने वन्यजीव अधिकारियों से मशीनों का काम रोकने और क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा करने की मांग की है।

इनका कहना है 

अंधेरी एरिया में जूली फ्लोरा और लैंटाना घास खरपतवार के रूप में उगी हैं, जो वन्यजीवों के लिए उपयुक्त अन्य प्रकार की घास को नहीं उगने देती, इसी के चलते जेसीबी चलाई जा रही है, जेसीबी बाघिन के नजदीक नहीं जा रही है, इसकी पूरी मॉनिटरिंग कर रहे है - शंकर सिंह, रेंजर, सरिस्का बफर

Updated on:
26 Oct 2026, 11:28 AM IST
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