
अलवर. दूर दराज से बाघ देखने की तमन्ना लिए सरिस्का पहुंच रहे पर्यटकों को जंगल में भैंस दिखेगी तो कोई यहां क्यूं आएगा। यही कारण है कि भौगोलिक दृष्टि से सहज होने के बाद भी सरिस्का में पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या रणथंभौर से दसवां हिस्सा भी नहीं है। वर्ष 2017-18 के आंकड़े गवाह है कि सरिस्का में इस दौरान मात्र 42 हजार 779 पर्यटक ही पहुंचे, वहीं रणथंभौर में पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या 4 लाख 90 हजार 942 रही।
सरिस्का एवं रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अंतर करें तो भौगोलिक दृष्टि से सरिस्का पर्यटकों के लिए ज्यादा सहज है। दिल्ली एवं जयपुर से सरिस्का की दूरी लगभग समान है। वहीं रणथंभौर की दिल्ली से दूरी ज्यादा है और यातायात के साधन भी सरिस्का की तुलना में कम सुलभ है। इसके बाद भी दोनों टाइगर रिजर्व पार्कों में पर्यटकों की पहली पसंद रणथंभौर बना हुआ है।
जंगल की खूबसूरती में रणथंभौर से आगे
सरिस्का जंगल की खूबसूरती में रणथंभौर से काफी आगे हैं। यहां जंगल में कहीं पहाड़ी तो कहीं पठार, नदी व नालों में बहता पानी एवं दूरदराज तक हरियाली सरिस्का को रणथंभौर से बेहतर बनाती है। इसके बावजूद पर्यटकों को आकर्षित करने में वह पीछे है।
सरिस्का में लोग व मवेशी की दखल ज्यादा
रणथंभौर पार्क क्षेत्रफल की दृष्टि से सरिस्का से काफी छोटा है। फिर भी पर्यटक रणथंभौर जाना पसंद करते हैं। सरिस्का की राह में मानवीय व मवेशियों की दखल बड़ा रोडा है। इसका कारण भी साफ है कि देश विदेश से पर्यटक बाघ एवं अन्य वन्यजीव तथा खूबसूरत जंगल को देखने के लिए टाइगर रिजर्व आते हैं। लेकिन सरिस्का में पर्यटकों को बाघ के बजाय भैंस देखने को मिलती है। यानि सरिस्का में टाइगर दिखने की संभावना कम रहती है। सरिस्का के जंगल में ग्रामीणों की आवाजाही व मवेशियां बहुतायत में है। इस कारण बाघ एकांत क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं। इस कारण पर्यटकों को बाघ की साइटिंग कम ही हो पाती है।
सरिस्का से 10 गुना ज्यादा पर्यटक रणथंभौर में
वर्ष पर्यटक सरिस्का पर्यटक रणथंभौर
2007-08 31750 159110
2008-09 38597 178563
2009-10 44248 203417
2010-11 44236 239269
2011-12 34403 288528
2012-13 23063 246766
2013-14 32361 324325
2014-15 40275 374134
2015-16 52170 433147
2016-17 52205 469850
2017-18 42779 490942
मवेशियों की चराई बड़ी समस्या
सरिस्का में मानवीय दखल व मवेशियों की चराई बड़ी समस्या है। पर्यटक जंगल में बाघ व अन्य वन्यजीव देखने आते हैं, कई बार उन्हें मवेशी दिखाई पड़ती है। इन समस्याओं का पर्यटकों पर असर पड़ता है।
डॉ. जीएस भारद्वाज, सीसीएफ, सरिस्का बाघ परियोजना