Sumit Arora interview: मशहूर टीवी सीरियल 'चिड़ियाघर' और 'ऑफिस ऑफिस' से घर-घर में पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता सुमित अरोड़ा (Sumit Arora) हाल एक कार्यक्रम में शामिल होने अलवर पहुंचे। राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने आज के मनोरंजन, बच्चों में बढ़ते मानसिक तनाव और अभिनय की दुनिया में अपने संघर्ष के अनुभवों को खुलकर साझा किया।

Sumit Arora interview: अलवर प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता व नाट्य अभिनेता सुमित अरोड़ा एक कार्यक्रम में अतिथि के तौर अलवर आए। ये पवित्र रिश्ता, ऑफिस ऑफिस व चिडियाघर जैसे नाटकों में अभिनय कर दर्शकों पर कला का जादू बिखेर चुके हैं। चिड़ियाघर में बाबूजी के बड़े बेटे का किरदार आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं, जो कि बहुत ही मनोरंजक था।
इस दौरान राजस्थान पत्रिका से बातचीत में उन्होंने बताया कि आज ऐसे सीरियल बहुत पसंद किए जाते हैँ जो मनोरंजन से भरपूर हो और परिवार के साथ बैठकर देखे जा सके। इसलिए चिड़ियाघर बहुत पसंद किया गया। इन दिनों में ऑफिस ऑफिस का दूसरा एपिसोड ऑफिस चला मुसद्दी जो कि दूरदर्शन पर प्रसारित किया जा रहा है
इसमें अभिनय कर रहे हैं, इस एपिसोड में बताया गया है कि भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं हो सकता लेकिन भ्रष्टाचार से कैसे निपटा जाए इसके बारे में बताया गया है। यह दूरदर्शन के ओटीपी प्लेटफार्म पर भी दिखाया जा रहा है।
इनका कहना था कि पहले बड़ों में ही स्ट्रेस की समस्या थी लेकिन आज कल बच्चे भी स्ट्रेस ले रहे हैं, ऐसे में माता पिता को चाहिए कि वो बच्चे पर अपनी बातें न थोपें अगर वो शिक्षा में आगे नहीं बढ़ रहा है तो रूचि के अनुसार उसे बढ़ने दे। जब मैं कक्षा 6 में था तो अनायास ही मुझे अभिनय की प्रतियोगिता में भाग लेना पड़ा।
इसमें मैं प्रथम आया, इससे मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली और हर साल प्रतियोगिता में भाग लेने लगा और इसके बाद विधिवत अभिनय का प्रशिक्षण लिया और आज इस मुकाम पर हूं। मैं अपनी बीवी से बहुत प्यार करता हूं इसलिए चिड़ियाघर नाटक में मुझे जब अपनी बीवी से प्यार करने का अभिनय किया तो यह बहुत सहजता से हो गया।
जब कोई अभिनेता बडे़ मुकाम पर पहुंच जाता है तो समाज के प्रति जिम्मेदारी बढ़ जाती है, उसे देश के लाखों देखते और सुनते हैं, उससे प्रेरणा लेते हैं इसलिए ऐसा काम करे कि समाज में कुछ अच्छा संदेश जाए। इनका कहना था कि संघर्ष करने से ही व्यक्ति आगे बढ़ता है, संघर्ष के बाद भी असफलता मिलती है तो डरे नहीं उससे भी जीवन का नया सबक मिलता है। मेहनत और संघर्ष के बाद जीत अवश्य मिलती है।