अलवर

Video : सरकारी विकास का पहिया : तीन दशक से अलवर एनसीआर में बड़े सपने दिखाए, पर बदला कुछ नहीं

पानी की सप्लाई का कोई प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं आ पाया। रोड व आवासीय कॉलोनियां भी एनसीआर के मापदण्डों के अनुसार विकसित नहीं की गई।

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Oct 11, 2017
Alwar shows big dreams in NCR but nothing changes

धर्मेंद्र यादव. अलवर.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अलवर जिले को शामिल हुए करीब तीन दशक का समय पूरा होने वाला है, इस अवधि में जिले के विकास के लिए कई बड़े सपने देखे गए, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास का पहिया उस रफ्तार से नहीं दौड़ पाया, जितनी उम्मीद थी। उल्टा यहां बेतरतीब औद्योगिक इकाइयां लगने से प्रदूषण की समस्या के जद में अलवर आ गया।

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36 हजार 600 करोड़ का दिल्ली से अलवर का मेट्रो रेल का प्रोजेक्ट मंजूर कर दिखाए गए सपने भी दम तोड़ती नजर आ रही है। कार्गों इंटरनेशनल एयरपोर्ट स्वीकृत होकर रह गया। न यहां ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित हुआ न सेक्टर प्लान बनाए गए। न कोई एयरपोर्ट आया। पानी की सप्लाई का कोई प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं आ पाया। रोड व आवासीय कॉलोनियां भी एनसीआर के मापदण्डों के अनुसार विकसित नहीं की गई।

अब पानी को मिला 258 करोड़ रुपया

एनसीआर के जरिए जिले में सात जगहों पर वाटर सप्लाई के लिए करीब २८५ करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। जिसका काम भी चल रहा है। इस प्रोजेक्ट का पैसा भी कृषि कॉलोनियों मंे अधिक खर्च किया जा रहा है। शहर के आधारभूत ढांचों के बदलने पर कोई योजना नहीं बनी।

यूआईटी को ऋण जरूर मिला

एनसीआर से अलवर यूआईटी को बुध विहार, हसन खां व अम्बेडकर नगर आवासीय कॉलोनियों के लिए ऋण मिला। यह पैसा चुकता भी कर दिया गया। भिवाड़ी यूआईटी ने कभी एनसीआर से कोई ऋण भी नहीं लिया। भिवाड़ी में भी एनसीआर से केवल पानी की लाइन डालने का काम किया जा रहा है।

सेक्टर प्लान नहीं बना


बड़ी-बड़ी मल्टी नेशनल कम्पनियां अलवर के भिवाड़ी, नीमराणा, टपूकड़ा व अलवर एमआईए में स्थापित हो चुकी हैं। हजारों लोग काम कर रहे है।

962 करोड़ सड़कों को मिला, सड़कें नहीं बनी

सड़कों को लेकर करीब ९६२ करोड़ रुपए की मंजूर किए गए। हालांकि उनका कार्य शुरू नहीं हो सका है। यह प्रक्रिया कई सालों से चलती आ रही है। सड़कें कब तक बनेंगी। अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। बल्कि सरकारें एनसीआर से बड़ा बजट लेकर सड़कें बनवाने का ढिंढोरा पीट रही हैं।

नुकसान ज्यादा

एनसीआर में शामिल होने का फायदे से कहीं ज्यादा नुकसान हो रहा है। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रिंया लग गई। मनमर्जी से धुआं छोड़ा जा रहा है। आधुनिक उपकरण लगा प्रदूषण कम करने का कोई दबाव नहीं है। आमजन को कई तरह के कामकाज के लिए एनसीआर से एनओसी लानी पड़ रही है।

एनसीआर का जमीनी असर लाभ कम

पूरे जिले के एनसीआर में शामिल होने की कहीं झलक भी नहीं दिखती। रीको के बनाए जापानी जोन व कोरियाई जोन जरूर अलग पहचान रखते हैं। इसके अलावा न गांव न कस्बे व शहरों में कोई सिस्टम नहीं बनाया गया। आज भी ग्रामीण लोग बस व जीपों की छतों पर यात्रा कर जान जोखिम में डाल रहे हैं। ट्रांसपोर्ट का सिस्टम नहीं आया। कस्बे व शहरों की बसावट में एनसीआर की कोई दखलनदाजी नहीं है। कृषि कॉलोनियों मंे बेतरतीज बसावट हो रही है। पानी, रोडलाइट व गंदगी की समस्या से जन-जन बेहाल है।

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Published on:
11 Oct 2017 12:06 pm
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