
अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (Sant Gahira Guru Vishwavidyalaya Surguja) में कथित वित्तीय अनियमितताओं, कुप्रबंधन और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद के प्रदेश मंत्री अनंत सोनी ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर विश्वविद्यालय के विभिन्न मदों में खर्च, कुलपति आवास, फर्नीचर खरीदी, टेंडर प्रक्रिया और शुल्क वृद्धि को लेकर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिषद का कहना है कि विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी कर विश्वविद्यालय की राशि का अनावश्यक उपयोग किया जा रहा है। वहीं अभाविप ने इस मामले में अपनी ही सरकार को भी घेरा है। उनका कहना है कि विवि सरकार की निगरानी में नहीं चल रहा है। उन्होंने कुलपति के एलिजिबिलिटी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि कहीं न कहीं भाजपा सरकार की गलती है, जिन्होंने ऐसे लोगों को क्यों बैठाया। उन्होंने विस घेराव की भी बात कही है।
अभाविप ने आरोप लगाया कि करीब 1 करोड़ रुपए की लागत से कुलपति भवन का निर्माण होने के बावजूद कुलपति किराए के भवन में रह रहे हैं। परिषद ने सवाल किया कि जब विश्वविद्यालय (University) का अपना आवास उपलब्ध है तो किराए के भवन पर अतिरिक्त राशि क्यों खर्च की जा रही है। इस खर्च और निर्णय प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
परिषद के अनुसार विश्वविद्यालय के मद से करीब 22 लाख रुपए के सोफा व फर्नीचर खरीदे गए हैं। इसके अलावा एसी, पंखे और अन्य सामान भी विश्वविद्यालय की राशि से खरीदे जाने का दावा किया गया है। अभाविप का आरोप है कि इन सामानों को पुराने स्थान से नए किराए के भवन में ले जाकर उपयोग किया जा रहा है।
परिषद ने इसकी अनुमति, बिल और उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। वहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि विवि मद से खरीदी गई कार को कुलपति की पत्नी (Vice Chancellor wife) चला रही हैं।
अभाविप ने असिस्टेंट रजिस्ट्रार सीएल टंडन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। परिषद का आरोप है कि विश्वविद्यालय की सफाई व्यवस्था से जुड़े ट्रैक्टर कार्य में करीब 8 लाख रुपए खर्च हुए। इसमें करीब 6 लाख रुपए का भुगतान किया गया, जबकि लगभग 2 लाख 7 हजार रुपए की राशि कथित तौर पर टंडन को भुगतान के लिए दी गई थी। परिषद का आरोप है कि उक्त राशि के व्यक्तिगत उपयोग की बात सामने आई है। अभाविप ने बिल, वाउचर, बैंक व लेखा विवरण तथा स्वीकृति आदेश की जांच की मांग की है।
परिषद ने विभिन्न टेंडर प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में सबसे कम दर वाले एल-1 निविदाकार के बजाय एल-2 निविदाकार को काम दिया गया। अभाविप (ABVP) ने ऐसे सभी मामलों में एल-1 और एल-2 की दर, चयन का आधार और कार्यादेश जारी करने की प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की है।
अभाविप ने छात्र कल्याण शुल्क, पीएचडी शुल्क समेत अन्य शुल्कों में वृद्धि का विरोध किया है। परिषद का कहना है कि विद्यार्थियों से लगातार शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन सुविधाओं में उसके अनुरूप सुधार नहीं हुआ है। सुरक्षा पर करीब 9.62 लाख रुपए और सफाई पर 1.89 लाख रुपए के खर्च की आवश्यकता और औचित्य पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अभाविप प्रदेश मंत्री ने कहा कि ये कुलपति बनने के लिए एलिजिबल ही नहीं हैं। विवि सरकार की निगरानी में नहीं चल रहा है, ये कहीं न कहीं हमारी सरकार (BJP Government) की ही गलती है, जो ऐसे लोगों को बिठा दिया। हम इसे लेकर राज्यपाल, सीएम से लेकर उच्च शिक्षा मंत्री से मिलेेंगे। जरूरत पड़ी तो विधानसभा का भी घेराव करेंगे।
इस संबंध में संत गहिरा गुरु विवि के कुलपति राजेंद्र लाकपाले (Vice Chancellor) का कहना है कि विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र भकुरा में बना हुआ है। यहां बिजली, मोबाइल नेटवर्क, पानी सहित कई सुविधाओं की कमी है। इसके बावजूद मैं यहां भी रहता हूं। उनके द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत है। यह उनका प्रायोजित कार्यक्रम है। किसी के बहकावे में आकर आरोप लगा रहे हैं।