
अंबिकापुर। शहर के नमनाकला निवासी शिक्षक विभागीय मीटिंग में शामिल होने सोमवार को बाइक पर सवार होकर बलरामपुर जा रहे थे। वे अंबिकापुर-प्रतापपुर मार्ग से होते हुए सेमरसोत वाले रास्ते की ओर बढ़े ही थे कि प्रतापपुर से करीब 10 किमी की दूरी पर बाइक अनियंत्रित होकर सडक़ किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे (Road accident) में गंभीर रूप से घायल शिक्षक को स्थानीय लोगों की सूचना पर प्रतापपुर अस्पताल लाया गया। यहां जांच पश्चात डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में शिक्षक की मौत की खबर मिलते ही उनके परिजनों में मातम पसर गया। पीएम पश्चात परिजन द्वारा शव अंबिकापुर लाया गया। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंबिकापुर के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी नमनाकला निवासी राजकुमार शर्मा 48 वर्ष शिक्षक (Teacher died) थे। वे बलरामपुर में जिला ग्रंथालय प्रभारी के पद पर इन दिनों पदस्थ थे। ड्यूटी समय में वे अधिकांश समय वहीं किराए के मकान में रहते थे। शनिवार को ड्यूटी के बाद वे अपने घर आ गए थे। रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को वे विभागीय बैठक में शामिल होने सोमवार को बाइक पर सवार होकर बलरामपुर जा रहे थे।
वे सुबह करीब 11.30 बजे प्रतापपुर-सेमरसोत मार्ग पर ग्राम सिलौटा के पास पहुंचे ही थे कि अचानक बाइक अनियंत्रित हो गई और वे सडक़ किनारे पेड़ से जा टकराए। टक्कर (Bike collided from tree) इतनी जबरदस्त थी कि उनके सिर समेत शरीर के अन्य हिस्से में गंभीर चोटें आईं। वहीं उनकी बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई।
हादसे के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। उन्होंने डायल 112 को सूचना दी। डायल-112 की टीम द्वारा गंभीर रूप से घायल शिक्षक को प्रतापपुर अस्पताल लाया गया। यहां जांच पश्चात डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि सिर में चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत (Teacher death) हो गई थी।
सडक़ हादसे में शिक्षक की मौत की सूचना प्रतापपुर पुलिस द्वारा मोबाइल से परिजन को दी गई। सूचना मिलते ही परिजन में हडक़ंप मच गया। इसके बाद वे प्रतापपुर अस्पताल पहुंचे। यहां पुलिस ने पीएम पश्चात शव उन्हें सौंप दिया। शिक्षक की मौत (Teacher death news) से उनकी पत्नी व बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है।
मंगलवार को शिक्षक का शंकरघाट स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया। बताया जा रहा है कि अंबिकापुर-रामानुजगंज रोड की हालत खस्ता होने की वजह से वे प्रतापपुर मार्ग पर सफर कर बलरामपुर जा रहे थे, लेकिन नीयती को कुछ और ही मंजूर था।