अंबिकापुर

सावधान! कहीं आप भी तो नहीं पी रहे कूल जार में बंद पानी, सच्चाई जानकर फटी रह जाएंगीं आंखें

ठंडा व शुद्ध पानी के नाम पर कई कंपनियां चला रही गोरखधंधा, लोगों की सेहत के लिए खतरनाक है ये पानी
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Water
Cool jar water

अंबिकापुर. बिना आईएसआई मार्का और खाद्य विभाग से लाइसेंस लिए पानी पाउच व बोतल के बाद अब कूल जार का पानी लोगों की सेहत का दुश्मन बनता जा रहा है। चिल्ड जार के नाम से बिक रहा यह पानी अलग तरह का ही प्रोडक्ट है। इसके लिए कोई मानक शासन द्वारा तय नहीं है। बावजूद इसके यह धंधा शहर में जोरों से फल-फुल रहा है।

यदि इस पानी का उपयोग आप भी कर रहे हैं तो यकीन मानिए आप अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हम जो पानी पी रहे हैं, क्या वह वाकई में शुद्ध है। इस पर गहनता से विचार करना होगा। पानी बेचने वाली कुछ कंपनियां शुद्ध पानी के नाम पर केवल चिल्ड पानी बेचकर मालामाल हो रही हैं।


खाद्य विभाग और भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों में कहीं भी कूल जार से ठंडे पानी के व्यवसाय का जिक्र नहीं होने से नियम-कायदे नहीं बनाए गए हैं। उपभोक्ताओं को यह भी पता नहीं है कि 24 घंटे तक ठंडा रहने वाला यह पानी न तो किसी लैब से होकर गुजरता है और न ही परीक्षण से। चिल्ड मशीन के जरिए पानी को ठंडा करके सीधे कूल जार में भरकर बेचा जा रहा है।

शहर में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के नाम पर गोरखधंधा चल रहा है। पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के लिए 59 अलग-अलग तरीकों से पानी को शुद्ध किया जाना है। लेकिन शहर में ऐसी कंपनियां भी चल रही है जो एक कमरे में संचालित हो रहीं हैंं। न इनके पास टेस्टिंग लैब है और न ही जरूरी इंफ्रंास्ट्रक्चर है।

इससे बड़ा मामला यह है कि बीआईएस यानी भारतीय मानक ब्यूरो का लाइसेंस लिए बगैर ही इन कंपनियों द्वारा चिल्ड वाटर बेचने का धंधा जोरों पर चलाया जा रहा है। एक कमरे में सामान्य फिल्टर लगाकर पानी को शुद्ध करने का खेल चल रहा है।


धड़ल्ले से बिक रहा है चिल्ड वाटर
शहर के अंदर दो कंपनियों द्वारा चिल्ड वाटर जार में भरकर बेचने का काम किया जा रहा है। इसमें एक ग्राम पंचायत खैरबार में अमृत चिल्ड के नाम से ठंडा पानी शहर के अधिकांश हिस्सों में खपाया जा रहा है। इसे कई बार प्रशासन व जिम्मेदार विभाग द्वारा हिदायत भी दी गई है। लेकिन इसके बावजूद इस संस्था द्वारा बिना मानक के ही पानी बेचने का काम किया जा रहा है। अमृत चिल्ड कंपनी के पास न तो लाइसेंस है और न ही कोई संसाधन उपलब्ध है।


पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर में आईएसआई मार्का आवश्यक
भारतीय मानक ब्यूरो, बीआईएस के अनुसार पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर में आईएसआई मार्का होना अनिवार्य है। इसके लिए ना तो खाद्य विभाग से लाइसेंस मिलेगा और न ही बीआईएस से। वर्ष 2001-2002 में बीआईएस ने पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर में आईएसआई मार्का की अनिवार्यता को लागू कर दिया है।


दुकानों में खपाते हैं ठंडा पानी
ठंडा पानी होने की वजह इनका सबसे अधिक खपत दुकानों में होती है। शहर के देवीगंज मार्ग, सदर रोड, सरस्वती शिशु मंदिर रोड, ब्रम्ह रोड के कपड़ा दुकानों के साथ अधिकांश किराना दुकानों में इन कंपनियों के कूल जार नजर आ जाएंगे। इसके साथ ही होटलों व किराना दुकानों में भी कूल जार की खपत सबसे अधिक होती है।


लाइसेंस लेना है जरूरी
भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार बीआईएस से लाइसेंस लेने के बाद कंपनियों को खाद्य विभाग से भी लाइसेंस लेना होता है। भारतीय मानक ब्यूरो ऐसी कंपनियों की लाइसेंस प्रदान करता है, जिनके पास गाइडलाइन के मुताबिक लैब के साथ ही पानी की शुद्धता मापने की गारंटी हो जांच के बाद उन्हें अनुमति दी जाती है। जांच के लिए खाद्य एवं औषधि विभाग अधिकृत है।


ये होना अनिवार्य
1. टेस्टिंग लैब- फैक्ट्री में टेस्टिंग लैब के अलावा नेशनल एफिडेशन बोर्ड लेबोरेट्री का सर्टिफिकेट जरूरी
2. फिल्टर- माइक्रो बॉयोलॉजिकल
3. गारनेट फिल्टर- यह पानी में माइक्रॉन साइज के कणों को शुद्ध करता है
4. यूवी ट्रीटमेंट- इसमें पानी में मौजूद बैक्टीरिया को अल्ट्रा वायलेट प्रकाश से समाप्त किया जाता है।
5. ओजोनाइजेशन- यह पानी में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने का सबसे बड़ा उपकरण है।
6. एक्टीवेटेड कार्बन फिल्टर- यह पानी में मौजूद पेस्टीसाइड्स, बदबू और कलर को साफ करता है।
7.लेबलिंग- जिस पानी को शुद्ध किया जाता है, उसमें लेबलिंग आईएसआई मार्का, खाद्य विभाग के लाइसेंस नम्बर, मैन्यूफेक्चरिंग और एक्सपायरी की तारीख सहित कस्टमर केयर नंबर और कंपनी का पूरा पता लिखा होता है।


की जाएगी कार्रवाई
इस संबंध में जानकारी लेकर प्रशासन द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
किरण कौशल, कलक्टर

Published on:
02 Jun 2018 02:58 pm
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