
अंबिकापुर. होर्डिंग विज्ञापन को निरस्त करने, अवैधानिकता एवं दुव्र्यवहार की शिकायत को लेकर गुरुवार की सुबह पूर्व पार्षद व रशीद एडवरटाइजर्स के संचालक ने निगम के प्रशासनिक कार्यालय में अमरण-अनशन शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जब समस्या को लेकर आयुक्त से मिलने उनके चैंबर में पहुंचे थे तो उन्होंने पहले तो वहां से जाने के लिए कहा।
इसके बाद कर्मचारी से कहा कि इसे बाहर करो नहीं तो पुलिस बुलाऊंगी। आमरण-अनशन की जानकारी मिलते ही महापौर डॉ. अजय तिर्की ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। इसके साथ ही 15 दिन के भीतर सभी मामलों को सुलझााने की बात की। इसके बावजूद पूर्व पार्षद ने इसे मानने से इनकार कर दिया और अनशन जारी रखा।
नगर निगम के पूर्व पार्षद व विधायक प्रतिनिधि रशीद खान ने गुरुवार को निगम अधिकारियों पर अनियमितता, अवैधानिकता एवं दुव्र्यवहार किए जाने का आरोप लगाते हुए नगर निगम परिसर में ही आमरण-अनशन शुरू कर दिया गया है। रसीद खान ने बताया कि निगम में विज्ञापन एजेंसी को लेकर शासन द्वारा जारी राजपत्र का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। अधिकारी-कर्मचारी मनमाने तरीके से नियम व शर्त थोप रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कलक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा था। उनके द्वारा होर्डिंग बोर्ड निविदा हेतु रशीद एडवरटाइजर्स व आरके पब्लिसिटी के नाम से विज्ञापन एजेंसी संचालित की जाती है। वर्ष 2016-17 में निगम द्वारा बुलाई गई निविदा में दोनों फर्म के नाम से निविदा भरी गई थी। इसमें जोन क्रमांक-2 व जोन क्रमांक-5 के लिए उनकी निविदा स्वीकार करने के साथ ही सामान्य सभा में भी स्वीकृत की गई थी।
निविदा पांच वर्षों के लिए जारी की गई थी। निविदा के बाद दोनों ही फर्म द्वारा 1 लाख 60 हजार रुपए जमा भी किया गया था। इस संबंध में जब पूर्व पार्षद आयुक्त से मुलाकात करने उनके चैंबर में पहुंचे तो उन्होंने वापस जाने को कहा।
इतना ही नहीं आयुक्त ने अपने कर्मचारियों को बुलाकर कहा कि इसे बाहर कर दो, नहीं तो पुलिस बुलाऊंगी। उनके व्यवहार से क्षुब्ध होने के बाद अपने व्यवसाय के प्रभावित होने का हवाला देते हुए कई बार मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन नहीं मिलने पर आमरण-अनशन शुरू कर दिया।
अन्य एजेंसियों को पहुंचाया फायदा
महापौर से चर्चा करते हुए रशीद खान ने कहा कि निगम के अधिकारी राजपत्र से हटकर 3 वर्ष की जगह गलत तरीके से 5 वर्ष के लिए निविदा जारी की गई है, जो अवैध है। इसके साथ ही एक निजी मोबाइल कम्पनी को एक ही दिन विज्ञापन एजेंसी बना दिया और उसी दिन उससे होर्डिंग लगाने का 85 लाख 28 हजार रुपए शुल्क जमा करा लिया गया है। जबकि कार्यालय द्वारा कोई भी नोटसीट नहीं चलाया गया है।