अभा कवि सम्मेलन में लखनऊ के वीररस के कवि प्रख्यात मिश्रा, बाराबंकी के कमल आग्नेय व उदयपुर के ओज व हास्यव्यंग्य के कवि अजातशत्रु
अंबिकापुर. अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में अपनी ओजपूर्ण व वीर रस से शहरवासियों में जोश भरने देश की प्रख्यात कवयित्री कविता तिवारी ने पत्रिका से चर्चा करते हुए कहा कि उनका पूरा परिवार हिन्दी साहित्य व काव्य के रस से रसास्कित है। मुझे लगता है कि मेरी कविता का अभी शैशव काल है। परिवार की सबसे छोटी बेटी होने की वजह से मैं हमेशा कवि सम्मेलन में अपने आपको नन्ही कलम कहती हूं। इससे, मुझे श्रोताओं का व मंच का हमेशा स्नेह मिलता रहा है।
छत्रपति शिवाजी सेवा संघ द्वारा शहीदों के स्मरण में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन बुधवार को कलाकेन्द्र मैदान में किया जाएगा। शाम 7.30 बजे से देश के प्रख्यात कवि इसमें शामिल होकर वीररस के ओजस्वी कवियों द्वारा राष्ट्रप्रेम, देशभक्ति कविताओं के माध्यम से वीर शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में उत्तरप्रदेश लखनऊ की प्रख्यात कवयित्री कविता तिवारी ने दूरभाष पर पत्रिका से चर्चा की। कविता तिवारी ने मंचीय व लेखकीय कविता के संबंध में अंतर को बताते हुए कहा कि दोनों कविता में सिर्फ सम्प्रेषण का अंतर है। मंचीय काव्य पाठ में कवि का जुड़ाव सीधे श्रोताओं से होता है।
इसकी वजह से मंचीय कवि अपने भाव को सीधे श्रोताओं तक पहुंचा सकता है, जबकि पुस्तकीय कवि जिस भाव से लिखते हैं, जरूरी नहीं है कि वह श्रोताओं तक उसी भाव में काव्य रचना पहुंचे। काव्य को सही तथ्यों व भाव के साथ पहुंचाना पुस्तकीय कवियों के लिए बड़ी चुनौती है। कवि सम्मेलन के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम भी किया जाता है।
नई कविता पढऩे पर कई बार श्रोता हुटिंग भी कर देते हैं। इन सब से पुस्तकीय कवि बचे रहते हैं। भारतीय परम्परा के जितने भी कवि हैं वे जागरण का काम करते हैं। लोगों को जागरूक करने का काम कवि सम्मेलनों के माध्यम से करना काफी आसान होता है। हमारा एक श्रोता वर्ग होता है जो हमें सुनने आता है। पुस्तकीय कवि को श्रोता ढूंढने जाना नहीं होता है।
छन्दोबद्ध कविता नहीं हो सकती समाप्त
कविता तिवारी ने कहा कि छंदोबद्ध कविता का दौर समाप्त नहीं हो सकता है। छंदोबद्ध कविता व्याकरण को शब्दों में डालकर लोगों के सामने प्रस्तुत करना है। नई कविता मुझे अच्छी नहीं लगती है। गद्य के माध्यम से तो कोई भी कविता लिख सकता है लेकिन जरूरी नहीं है कि उसे श्रोता सुने।
पूर्व के कवि प्रतीक के आधार पर लिखते थे कविता
कविता ने बताया कि आजादी से पूर्व के कवियों ने अपनी कविता में छायावाद को लिखा है। पूर्व के कवि प्रतीक के आधार पर कविता लिखते थे। यह उनकी मजबूरी थी। आज हम खुशनसीब हैं कि देश में लोकतंत्र हैं और कवि कुछ भी लिख सकता है। समाज में जैसे-जैसे परिवर्तन आता है कवि की कविता उसके आधार पर परिवर्तित होती रहती है।
वीर रस के साथ होगा हास्य का संगम
छत्रपति शिवाजी सेवा संघ द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन कराने का मुख्य उद्देश्य शहीदों के प्रति सम्मान की भावना का संचार करना है। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में लखनऊ के वीररस के कवि प्रख्यात मिश्रा, बाराबंकी के कमल आग्नेय व राजस्थान उदयपुर के ओज व हास्यव्यंग्य के कवि अजातशत्रु व मध्यप्रदेश धार के चुटीली बातों से शहर के लोगों को गुदगुदाने वाले कवि संदीप शर्मा भी अपनी प्रस्तुति देंगे।