
अंबिकापुर.कोरबा के 12 वर्षीय बालक की लखनपुर के ग्राम तुनगा में रेण नदी के किनारे सिर कटी लाश मिली थी। जांच में पता चला कि दो बेटों ने अपने मां-बाप के साथ मिलकर बच्चे की बलि चढ़ा दी थी। दरअसल मृत बालक के परिजन ने परेशानी में देखकर एक आरोपी को अपने घर में रातभर के लिए पनाह दी थी और वह उसके मासूम बेटे का अपहरण कर अपने साथ ले आया था।
नरबलि के इस मामले में शुक्रवार को तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाया। मामले में बाप व दो बेटों को अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। जबकि पत्नी को 3 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित करने का आदेश सुनाया है।
13 मई 2016 को सरगुजा जिले के लखनपुर के ग्राम तुनगा में रेण नदी के किनारे एक 12 वर्षीय बालक का शव मिला था। पुलिस ने मामले में अज्ञात के खिलाफ जुर्म दर्ज कर विवेचना शुरू की तो बालक की शिनाख्त कोरबा जिले के मोरगा क्षेत्र के कुदरी निवासी 12 वर्षीय सूरज धनवार पिता चमरू धनवार के रूप में हुई थी।
मामले में मृतक के परिवार वालों ने बताया कि लखनपुर निवासी 22 वर्षीय दीपन कंवर पिता शिवचरण कंवर 11 मई 2016 को मोरगा आया हुआ था। उसने मृतक के परिवार वालों से गाड़ी खराब हो जाने पर मदद मांगी थी। मृतक की बुआ बुधवारो बाई व फूफा बैसाखू ने उसे घर में रूकने की इजाजत दी थी लेकिन सुबह जब बैसाखू मछली मार कर घर वापस लौटा तो दीपन व 12 वर्षीय भतीजा सूरज घर में नहीं थे।
दीपन अपहरण का सूरज को अपने साथ घर ले आया था। बैसाखू ने गुमशुदगी की रिपोर्ट चिगार थाने में दर्ज कराई थी। दरअसल 13 मई को दीपन सूरज को मुर्गा खिलाने के नाम पर ग्राम तुनगा में रेण नदी के किनारे ले गया था। यहां दीपन व उसके पिता शिवचरण कंवर, भाई भारत कंवर, मां रमिन बाई ने मिलकर सूरज की गंड़ासा से हत्या कर दी और उसके दाहिने हाथ की नस भी काट डाली था। पुलिस ने शव को बरामद कर अज्ञात के खिलाफ विवेचना शुरू कर दी थी।
साक्ष्य के आधार पर हुए थे गिरफ्तार
मामले में आए साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने शिवचरण कंवर, भारत कंवर व दीपन कंवर व रमिन बाई को धारा 302, 364, 201 व 34 के तहत गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एलपीएस बघेल के न्यायालय में की जा रही थी।
मामले में आए साक्ष्य के आधार पर तृतीय अपर सत्र न्यायधीश ने धारा 302 व 301 के तहत शिवचरण, भारत व दीपन को अजीवन कारावास व धारा 364 के तहत भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही रमिन बाई को धारा 201 के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने पूरे मामले को प्रथम दृष्टया नर बलि का मानते हुए सुनवाई पूरी की।