
अंबिकापुर। हाथियों का लोकेशन टे्रस करने उन्हें रेडियो कॉलर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में शनिवार को तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद वन विभाग द्वारा 'बहरदेव' नामक हाथी को ट्रैंक्यूलाइज कर उसमें सेटेलाइट कॉलरिंग की गई है। इसे उत्तर भारत का दूसरा व मध्य भारत का पहला मामला वन विभाग द्वारा बताया जा रहा है। वन विभाग ने इस पूरे अभियान को 'बहरदेव मई 2018' नाम दिया था। साउथ अफ्रीका से ऐसे 3-3 लाख के 9 रेडियो कॉलर मंगाए गए हैं।
सेटेलाइट कॉलरिंग करने के लिए भारत सरकार से छत्तीसगढ़ सरकार को अनुमति प्रदान करने के बाद इसका सबसे पहला उपयोग सरगुजा वन वृत्त के बलरामपुर वन परिक्षेत्र में सक्रिय 'बहरदेव' हाथी पर किया गया। पिछले कुछ दिना से उत्तराखंड के भारतीय वन जीव संस्थान के सीनियर बॉयोलॉजिस्ट डॉ. बीवास पंड्या, बॉयोलॉजिस्ट लक्ष्मीनारायण व डॉ. अंकित की टीम सेटेलाइट कॉलरिंग करने के लिए योजना बना रही थी।
सरगुजा, बलरामपुर व सूरजपुर वन परिक्षेत्र में बहरदेव हाथी का काफी आतंक है। यह हाथी अकेला ही घूमता है, अब तक इसने किसी इंसान को तो नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन कई मकानों को तोडऩे के साथ ही फसलों को चट कर गया है। यह हाथी समूह के साथ भी घुल-मिल जाता है। इसलिए इस हाथी को कॉलरिंग करने के लिए चयनित किया गया।
हाथी को टैं्रक्यूलाइज करने में नंदन कानन के डॉ. जाडिया को महारत हासिल है। उन्हें इस अभियान में शामिल करने के लिए पीसीसीएफ की अनुमति आवश्यक थी। शुक्रवार को पीसीसीएफ से अनुमति ली गई और डॉ. जाडिया उसी दिन अंबिकापुर पहुंच गए। इसके बाद दोपहर में 'बहरदेव' हाथी का लोकेशन मिलने पर सीसीएफ केके बिसेन व वन्य जीव प्राणी सीसीएफ सीएस तिवारी के नेतृत्व में ऑपरेशन शुरू किया गया।
जंगल के बीचो-बीच हाथी के होने पर उसे गन के माध्यम से डॉट किया गया, लेकिन रात होने की वजह से आगे की कार्रवाई पूरी नहीं की जा सकी। इसकी वजह से सुबह ५.३० बजे एक बार फिर से अभियान की शुरूआत की गई। सुबह 8 बजे पहला डॉट हाथी को दिया गया।
इसके बाद उसे इंजेक्शन के माध्यम से बेहोश करने का प्रयास किया गया। लगभग 45 मिनट की मशक्कत के बाद हाथी खड़े-खड़े अचेत हो गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से लाए गए सेटेलाइट कॉलरिंग को महावतों की मदद से लगाया गया। जब सिग्नल मिला और डॉ. जाडिया द्वारा ओके रिपोर्ट दिया गया तब जाकर टीम के सदस्यों ने राहत की सांस ली।
मध्यभारत का पहला कॉलरिंग अभियान
सीसीएफ केके बिसेन ने बताया कि उत्तराखंड के राजा जी नेशनल पार्क में ५ माह पूर्व सेटेलाइट कॉलरिंग की गई है। इसके बाद यहां किया गया है। मध्य भारत का यह पहला कॉलरिंग ऑपरेशन है। लेकिन राजा जी नेशनल पार्क या अन्य सभी जगह कुमकी हाथी के मदद से सेटेलाइट कालरिंग का कार्य किया गया है। पूरे विश्व में यह पहला ऑपरेशन हैं, जो पैदल और पूरी तरह से वन विशेषज्ञों के देखरेख में पूरा किया गया।
ट्रैकर्स की मदद से लगाया गया पट्टा
हाथी के अचेत होने के बाद डॉ. बीवास पंड्या के साथ तमिलनाडू से आए तीन ट्रैकर्स की टीम भी आई थी, जो लगातार हाथी के लोकेशन ट्रेस कर रही थी। लेकिन हाथी के अचेत होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उसके गले में कॉलरिंग का पट्टा लगाना था। कुमकी हाथी होने पर उनकी मदद से आसानी से गले में पट्टा लगाया जा सकता था। लेकिन हाथी के ऊपर चढऩे सबसे बड़ी चुनौती थी। बोमेन व ज्ञानप्रकाश दोनों सगे भाई हैं, जो अन्नालमाई से आए हुए हैं।
दोनो भाई रिस्क लेकर हाथी के ऊपर चढ़े और उसके गले में अफ्रीका से लाए गए 15 किलो वजन का कॉलरिंग कसा। इसके बाद उसका सिग्रल ऑन किया गया। जब डॉ. जडिया द्वारा सिग्नल जांच करने के बाद ओके रिपोर्ट दी गई तब दोनों हाथी से नीचे उतरे। इस दौरान हाथी के नीचे उनके साथ आया सूर्या खड़ा था जो कॉलरिंग का नट कसने में सहयोग कर रहा था।
प्रतिदिन 74 देना पड़ता था मुआवजा
वन अधिकारियों के अनुसार हालांकि बहरदेव हाथी किसी प्रकार की जनहानि नहीं पहुंचाई जा रही थी। लेकिन उसके द्वारा जो मकान तोड़ा जाता था और फसल को नुकसान पहुंचाया जाता था। उसके एवज में प्रतिदिन 75 हजार रुपए का मुआवजा देना पड़ता था। अब हाथी का लोकेशन मिलने के बाद उसकी मदद से आसपास के क्षेत्र के लोगों को अलर्ट कर दिया जाएगा। इसके साथ ही समूह के सम्पर्क में आने के बाद समूह की भी जानकारी भी इससे मिल सकेगी।
12 हाथी को कॉलरिंग करने की मिली अनुमति
भारत सरकार द्वारा अब तक छत्तीसगढ़ सरकार को 12 हाथियों में सेटेलाइट कॉलरिंग करने की अनुमति दी गई है। इसमें सरगुजा वन वृत में ९ हाथी व अन्य वनवृत्त में ३ हाथी का चिन्हांकन कर कॉलरिंग की जानी है। इसकी रणनीति तैयार की जा रही है।
मोबाइल करा दिया गया था बंद
पूरे ऑपरेशन के दौरान टीम के सभी सदस्यों का मोबाइल बंद कराकर एक झोले में रखवा दिया गया था। इस ऑपरेशन से ग्रामीणों को दूर रखने के लिए सरपंच व वन समिति का भी सहयोग लिया गया था। हाथी को अचेत करने के बाद उसपर लगभग २ घंटे तक नजर रखी गई थी और उस पर लगभग एक टैंकर पानी भी डाला गया था। इसके बाद जब हाथी होश में आया तो उसे जंगल की तरफ रवाना कर दिया गया।
टीम में इन्हें किया गया शामिल
टीम में सीसीएफ केके बिसेन, सीएस तिवारी, बिवास पाण्डव, लक्ष्मीनारायण, अंकित, डॉ. जयकिशोर जाडिया, डीएफओ बलरामपुर विवेकानंद झा, एसडीओ एसबी चंदेल, महावत शिवमोहन, करमा, अमलेन्दु मिश्रा व प्रभात दुबे को शामिल किया गया था।