अंबिकापुर

नेता प्रतिपक्ष टीएस बोले- मुख्यमंत्री को अपने नाम के आगे से हटा देना चाहिए ‘डाक्टर’ शब्द

कांग्रेसियों ने नेता प्रतिपक्ष की अगुवाई में किया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अव्यवस्थाओं को लेकर किया घेराव, डीन को सुनाई खरी-खोटी
4 min read
• •
Updated: 28 Feb 2018, 7:25 PM IST
TS Singhdeo
TS Singhdeo

अंबिकापुर. जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा बुधवार को मेडिकल कॉलेज के अव्यवस्था व जीरो ईयर घोषित होने के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन व राज्य सरकार पर जमकर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने महालेखापरीक्षक के रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सरगुजा मेडिकल कॉलेज की स्थापना दो वर्ष विलंब से हुई।

केंद्र सरकार द्वारा सरगुजा में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए वर्ष 2014-15 में 53.2 करोड़ रुपए दिया था। लेकिन स्थानीय प्रबंधन की लापरवाही से खाते में करोडों रुपए पड़े होने के बाद भी यहां जरूरी व्यवस्थाएं नहीं की जा सकी। उन्होंने कहा कि जब रुपए रहते हुए राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज को बजट नहीं दे पा रही तो सीएम को अपने नाम के आगे से डॉक्टर शब्द हटा लेना चाहिए।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल की अव्यवस्थाओं, निर्माण कार्यों में हो रही देरी व उपकरणों की कमी को लेकर बुधवार को विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सामने स्थित रामानुज क्लब में सभा का आयोजन कर विरोध जताया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरगुजा में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद केन्द्र सरकार द्वारा 75 प्रतिशत अनुदान के साथ 189 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई थी।

स्वीकृति के साथ 2015-16 में सरगुजा मेडिकल कॉलेज के लिए 53.2 करोड़ रुपए केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किया गया था। लेकिन तथाकथित गोद लेने वाले मुख्यमंत्री इस राशि का उपयोग सिर्फ राजनांदगांव के लिए कर रहे हैं। राशि होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज के लिए डीएमएफ मद का उपयोग किया जा रहा है।

जब रुपए रहते हुए सरकार मेडिकल कॉलेज को बजट नहीं दे रही और यहां-वहां से रुपए खोजना पड़ रहा है तो मुख्यमंत्री को अपने नाम के आगे से 'डाक्टर' शब्द हटा देना चाहिए। सरकार शासकीय अस्पतालों को प्राइवेट सेक्टरों को बेचने की तैयारी कर रही है। सरकार ने घोषणा की है कि पैथोलैब व रेडियोलॉजी जांच निशुल्क किया जाएगा। इसका सीधा अर्थ है कि वे सभी जांच निजी हाथों में सौंपने की तैयार कर रहे हैं।

स्वास्थ्य बीमा का ८७ फीसदी भुगतान प्राइवेट अस्पतालों को किया जा रहा है। जबकि इसमें सबसे अधिक आम लोग परेशान हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में एक साल के अंदर 400 से अधिक बच्चों की मृत्यु हो जाती है, कौन इसका जवाब देगा। बच्चों हेतु एसएनसीयू वार्ड में 18 बेड हैं। उन्होंने कहा कि एमसीआई के मानक अनुसार 64 स्लाइस की सीटी स्केन मशीन की आवश्यकता है और कॉलेज प्रबंधन 32 स्लाइस के मशीन का ऑर्डर दे देता है।

ऐसे में समझ सकते हैं ये कैसे काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को डीन बनाने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी, जिन्हें जानकारी ही नहीं है। इस दौरान बालकृष्ण पाठक, हेमंत सिन्हा, गुरूप्रीत सिंह बाबरा, जेपी. श्रीवास्तव, अरविन्द सिंह गप्पु, राजेश मलिक , द्वितेन्द्र मिश्रा, प्रकाश साहू, पंकज चौधरी, राकेश सिंह, शैलेन्द्र सोनी, शैलेन्द्र प्रताप सिंह,निक्की खान, दुर्गेश गुप्ता, अख्तर हुसैन, मदन जायसवाल, सतीश बारी, हिमांशु जायसवाल, मधु दीक्षित, सीमा सोनी, नीतु शर्मा, हिरो बड़ा संख्या रवानी सहित अन्य कांग्रेसी उपस्थित थे।


समस्याओं के निदान के लिए नहीं लेते सुझाव
टीएस सिंहदेव ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर भड़ास निकालते हुए कहा कि दो वर्ष होने को हैं, न तो जीवन दीप समिति में जनप्रतिनिधियों को ये न तो आमंत्रित करना उचित समझते हैं और न ही समस्याओं के निदान हेतु कभी जनप्रतिनिधियों से कोई सुझाव लेते हैं। केवल अपनी मनमर्जी कॉलेज को चलाना चाहते हैं। इसकी वजह से एक वर्ष कॉलेज जीरो ईयर घोषित हो चुका है और अब दूसरे ईयर की ओर अग्रसर है।


मुख्यमंत्री को दे देना चाहिए इस्तीफा
सीतापुर विधायक अमरजीत भगत ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर हैं लेकिन सबसे बुरा हाल प्रदेश में मेडिकल व्यवस्था का है। ऐसे मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। मेडिकल कॉलेजे के लिये सरगुजा के कांग्रेसी विधायक विधानसभा में कई बार निलंबित हुए हैं। शफी अहमद ने कहा कि न तो सीटी स्कैन की व्यवस्था है न एमआरआई की सुविधा, टेली मेडिसीन का भी बुरा हाल है। इसके बावजूद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर हैं। लोगों की मौत ईलाज नहीं होने के कारण हो जाती है। ऐसी सरकार पर धिक्कार है।


घोषणा के अलावा कुछ नहीं आता
महापौर डॉ. अजय तिर्की ने कहा कि सत्ता में बैठी पार्टी को बयान देने और घोषणा करने के अलावे और कुछ नहीं आता। मेडिकल कॉलेज से लगी डिलीवरी होम काफी समय से जर्जर है, जहां पर प्रतिदिन काफी संख्या में डिलीवरी होती है। किसी दिन यदि कोई अनहोनी घट गई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। घोषणा कब की हुई है लेकिन बिल्डिंग आज तक नहीं बनी। मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन का यह हाल है कि एमसीआई से मान्यता मिले या न मिले इसकी परवाह उन्हें नहीं है।


पुलिस सुरक्षा के बीच डीन का हुआ घेराव
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुख्य गेट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच डीन का कांग्रेसियों ने घेराव किया। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने डीन डॉ. पीएम लुका से कहा कि जब खाते में 53 करोड़ से अधिक रुपए पड़े हुए हैं तो फिर डीएमएफ की रािश का उपयोग क्यों किया जा रहा है। समय पर लोगों का इलाज नहीं होने से उनकी मौत हो रही है।

इसके साथ ही सीटी स्केन मशीन की तत्काल व्यवस्था किए जाने की मांग की गई। उन्होंने डीन को स्पष्ट कहा कि अगर आप समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रहे है तो आपकी जरूरत यहां नहीं है। अभी तक यह नहीं पता है कि जीवन दीप समिति से काम लिया जा रहा है या फिर स्वायत्तशासी समिति काम कर रही है।

इस समिति में न तो यहां के विधायकों, सासंद को जानकारी है और न हीं कभी उनकी बैठक ली गई। एसएनसीयू में बेड नहीं है और बच्चे व मरीज इलाज के अभाव में मर रहे हैं। इसकी जवाबदारी कौन तय करेगा, आप जांच कराकर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं।

Published on:
Also Read
View All
Football News: संभाग स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता पर सरगुजा इलेवन का कब्जा, नाइस क्लब बलसेढ़ी को 1-0 से हराकर जीता खिताब

Ambikapur Dog Bite: होटल में महिला को कुत्ते ने काटा, फिर घरवालों की एक गलती पड़ी भारी, 15 दिन में ही हो गई मौत

IIT की तर्ज पर अंबिकापुर इंजीनियरिंग कॉलेज को मिली CGIT की सौगात, बाबा कार्तिक उरांव के नाम पर होगा नामकरण

Ambikapur Fraud Case: इंस्टाग्राम पर अल्ट्राटेक सीमेंट का देखा विज्ञापन, क्लिक करते ही आया सेल्स मैनेजर का फोन, लग गई 4.13 लाख की चपत

Surguja Road Accident: एनएच पर किराना व्यवसायी की ट्रेलर से कुचलकर मौत, जर्जर सडक़ पर अनियंत्रित हो गई स्कूटी, गोयल परिवार में पसरा मातम