
अंबिकापुर। झारखंड (तात्कालीन बिहार) के वासेपुर के कोल माफिया व डान फहीम खान की मां और मौसी की 18 अक्टूबर 2001 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में वासेपुर के गैंगस्टर (Wasseypur Gangster) शब्बीर आलम, उसके बड़े भाई समेत 7 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। इस दौरान शब्बीर आलम कोर्ट से फरार हो गया था। झारखंड हाई कोर्ट द्वारा उसे भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी संपत्तियों की कुर्की की गई थी। फरार होने के बाद वर्ष 2013 से गैंगस्टर शब्बीर आलम अंबिकापुर के मोमिनपुरा में छिपकर रह रहा था। राजहंस बस संचालक द्वारा यह जानते हुए भी कि वह हत्या का दोषी है, इसके बाद भी उसे बस कंपनी व सिलाई दुकान की आड़ में संरक्षण दिया। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने बस संचालक वैदुल खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।
बॉलीवुड मूवी गैंग्स ऑफ वासेपुर (Wasseypur gangster news) के असली कहानी का गैंगस्टर शब्बीर आलम पिछले 13 साल से अंबिकापुर में छिपा हुआ था। 6 दिन पूर्व धनबाद पुलिस उसे पकडऩे अंबिकापुर के मोमिनपुरा पहुंची थी। इस दौरान सादी वर्दी में होने की वजह से स्थानीय लोगों व उसके परिचितों ने आपत्ति दर्ज कराई।
इस बीच मौका पाकर गैंगस्टर शब्बीर आलम फरार हो गया था। गैंगस्टर के फरार हो जाने के बाद धनबाद पुलिस ने सरगुजा एसएसपी को सूचना दी। इसके बाद उसकी खोजबीन की गई, लेकिन वह नहीं मिल पाया था।
इसी बीच अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने मामले की छानबीन की तो पता चला कि मोमिनपुरा निवासी राजहंस बस के संचालक वैदुल खान ने यह जानते हुए भी कि गैंगस्टर शब्बीर आलम अपराधी है, उसे बस संचालन और सिलाई दुकान की आड़ में संरक्षण दिया था। 13 साल तक उसे पनाह देकर रखा था। इस मामले में पुलिस ने बस संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है।
बता दें कि झारखंड के धनबाद जिला अंतर्गत वासेपुर के गैगस्टर शब्बीर आलम (Shabbir Alam) और कोल माफिया फहीम खान के परिवारों के बीच कोयले के वर्चस्व व वसूली को लेकर खूनी रंजिश थी। इसी बीच 18 अक्टूबर 2001 में शब्बीर खान, उसके भाई साहिद ने साथियों के साथ मिलकर डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून को बाजार से लौटने के दौरान धनबाद के डायमंड क्रॉसिंग के पास गोलियों से भून दिया था। इससे दोनों की मौत हो गई थी।
डॉन की मां और मौसी की हत्या के मामले में पुलिस ने वर्ष 2013 में शब्बीर आलम, उसके भाई शाहिद समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसी बीच शब्बीर आलम फरार (Wasseypur gangster escaped) हो गया था। इस मामले में वर्ष 2018 में झारखंड हाईकोर्ट ने सातों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने फरार गैंगस्टर शब्बीर आलम को भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी संपत्तियां कुर्क करने के आदेश दिए थे।
बता दें कि वासेपुर गैंगस्टर की असल कहानी (Real story of Wasseypur gangster) से प्रेरित होकर डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने गैंग्स ऑफ वासेपुर मूवी बनाई थी, जो वर्ष 2012 में रिलीज हुई थी। डॉन फहीम खान का किरदार मूवी के पहले भाग में मनोज वाजपेयी तथा दूसरे भाग में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया था।