Amroha News: अमरोहा के हसनपुर ब्लॉक में मनरेगा के तहत चार कृषि तालाबों के निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया है। निर्धारित 8 लाख रुपये के बजट के बजाय 13.88 लाख रुपये खर्च कर दिए गए।
Mgnrega Scam Amroha: अमरोहा जिले में मनरेगा योजना के तहत हुए बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हसनपुर ब्लॉक क्षेत्र में चार किसानों के व्यक्तिगत कृषि तालाबों के निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। इस मामले में जांच के बाद तत्कालीन बीडीओ समेत कुल 9 अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी पाया गया है। डीएम निधि गुप्ता वत्स ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
जांच में सामने आया कि चार कृषि तालाबों के निर्माण के लिए प्रति तालाब 2 लाख रुपये की स्वीकृति थी, यानी कुल 8 लाख रुपये में कार्य पूरा होना था। लेकिन अधिकारियों ने मिलकर कुल 13,88,117 रुपये खर्च कर दिए, जो कि अनुमन्य सीमा से 5,88,117 रुपये अधिक है। यह वित्तीय गड़बड़ी सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है।
तालाब निर्माण कार्य के तहत गलसुआ गांव निवासी अबरार के खेत में 3,87,490 रुपये, फुरकान के खेत में 3,65,553 रुपये, इस्तेकार के खेत में 2,61,648 रुपये और ढक्का गांव निवासी हरीश के खेत में 3,73,426 रुपये खर्च किए गए। इन आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया कि तय सीमा से काफी अधिक धन खर्च कर अनियमितता की गई।
इस पूरे मामले की जांच में तत्कालीन बीडीओ, दो ग्राम प्रधान, दो पंचायत सचिव, एक तकनीकी सहायक, एक एपीओ और एक रोजगार सेवक को दोषी पाया गया है। डीएम ने गलसुआ पंचायत के प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक से 4,14,691 रुपये तथा ढक्का पंचायत के संबंधित जिम्मेदारों से 1,73,426 रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए हैं।
रिकवरी के अलावा डीएम ने तत्कालीन बीडीओ, एपीओ और रोजगार सेवक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी।
इस घोटाले का खुलासा मीडिया रिपोर्ट के जरिए हुआ, जिसके बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया। डीएम ने मामले की जांच के लिए सीडीओ को निर्देश दिए, जिन्होंने पीडी डीआरडीए को जांच सौंपी। विस्तृत जांच के बाद ही यह बड़ा घोटाला सामने आ सका।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पहले की जांच रिपोर्ट संतोषजनक नहीं थी और उसमें तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया गया। मौजूदा बीडीओ द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में शपथ पत्रों में बदलाव पाया गया, जिससे यह संकेत मिला कि कुछ अधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई थी। इस पर पीडी डीआरडीए ने स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन समय बीतने के बावजूद जवाब नहीं दिया गया।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि कुछ अधिकारियों ने मौजूदा बीडीओ को बचाने के लिए प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
डीएम निधि गुप्ता वत्स ने स्पष्ट कहा है कि मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों से रिकवरी सुनिश्चित की जाएगी और सभी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।