Amroha News: यूपी के अमरोहा जिले में 10 साल पुराने हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। रंजिश में गोली मारकर अब्दुल रहीम की हत्या करने के दोषी पाए गए पिता और उसके दो बेटों समेत चार लोगों को उम्रकैद की सजा दी गई है।
Amroha murder case court verdict 10 year imprisonment: अमरोहा जिले में 10 साल पहले हुई रंजिशन हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पिता और उसके दो बेटों समेत चार लोगों को उम्रकैद की सजा दी है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में सुनाया गया। सभी दोषी लंबे समय से जमानत पर थे, लेकिन सजा सुनाए जाने के बाद चारों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया। वहीं, इस मुकदमे के दौरान एक आरोपी की मौत हो चुकी थी।
घटना सैदनगली थाना क्षेत्र के गांव हरियाणा की है। 10 सितंबर 2010 की शाम अब्दुल रहीम अपने भाई अब्दुल गनी के साथ गांव की डेयरी पर दूध बेचकर घर लौट रहे थे। रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे मुख्तयार पुत्र बहार हुसैन, फुरकान पुत्र इसरार, आस मोहम्मद पुत्र इरशाद और दिलशाद पुत्र इरशाद के साथ इसरार पुत्र गुलजार हुसैन ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने अब्दुल रहीम पर गोली चलाई, जो सीधे सिर में लगी। मौके पर ही अब्दुल रहीम की मौत हो गई, जबकि उसका भाई किसी तरह अपनी जान बचाकर घर पहुंचा और पुलिस को सूचना दी।
घटना के बाद मृतक के भाई अब्दुल गनी ने पांचों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन कुछ समय बाद सभी को जमानत मिल गई और मामला अदालत में विचाराधीन रहा। वर्षों की सुनवाई के बाद, अदालत ने मंगलवार को पत्रावली के अवलोकन व साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं, जिनसे यह प्रमाणित होता है कि अभियुक्तों ने पूर्व नियोजित रंजिश में हत्या की थी। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि यह अपराध न केवल एक व्यक्ति की हत्या है, बल्कि समाज में भय का वातावरण फैलाने वाला कृत्य है। अदालत ने चारों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
ट्रायल के दौरान अभियुक्त इसरार पुत्र गुलजार हुसैन की मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। बाकी चारों दोषियों को मंगलवार को न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए जेल भेज दिया गया। पुलिस ने अदालत के आदेश की प्रति उच्चाधिकारियों को भेज दी है ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया और विभागीय रिकॉर्ड अपडेट किया जा सके।