Amroha Crime News: अमरोहा कोर्ट ने साढ़े तीन साल की मासूम से दुष्कर्म के मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए महज 60 दिनों में आरोपी को उम्रकैद और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
Rape Case Life Imprisonment Amroha: अमरोहा न्यायालय ने साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दोषी को मात्र 60 दिनों के भीतर उम्रकैद की सजा सुनाकर सख्त न्याय का उदाहरण पेश किया है। अदालत ने दोषी पर 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह महत्वपूर्ण फैसला अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायालय पॉक्सो प्रथम की अदालत द्वारा सुनाया गया, जिसने समाज में ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया है।
यह दिल दहला देने वाली घटना सैदनगली थाना क्षेत्र के एक गांव की है, जहां 6 जनवरी 2026 की देर शाम एक किसान की साढ़े तीन साल की बेटी घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हो गई। जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों की चिंता बढ़ गई और उन्होंने आसपास उसकी तलाश शुरू की। कुछ समय बाद बच्ची गांव के बाहर अर्द्धबेहोशी की हालत में मिली, जिससे पूरे गांव में सनसनी फैल गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की मदद से पुलिस ने आरोपी की पहचान गजेंद्र के रूप में की, जो गांव कुंदरकी भूड़ का निवासी है। पुलिस ने उसी रात करीब तीन बजे मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जिसमें उसके पैर में गोली भी लगी।
मामले की विवेचना दारोगा दीपक कुमार द्वारा की गई, जिन्होंने तेजी से साक्ष्य जुटाते हुए 2 फरवरी 2026 को अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद 17 फरवरी से मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ। इस दौरान पीड़िता ने अदालत में आरोपी की पहचान करते हुए अपने बयान दर्ज कराए, जो मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए।
करीब दो महीने तक चली सुनवाई में कुल 12 तारीखें पड़ीं और नौ गवाहों ने अदालत में अपनी गवाही दी। पूरे ट्रायल के दौरान आरोपी को जमानत नहीं मिली और वह जेल में ही बंद रहा। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक रतनलाल लोधी ने मजबूत पैरवी की, जबकि पुलिस की ओर से सैदनगली थाने के पैरोकार राजकुमार सिंह ने प्रभावी सहयोग दिया।
अदालत ने 16 अप्रैल को गजेंद्र को दोषी करार दिया और अगले ही दिन, 17 अप्रैल को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून किसी भी सूरत में बख्शेगा नहीं और त्वरित न्याय के जरिए समाज में विश्वास कायम किया जाएगा।