अमरोहा

बेटे ने कहा ‘पहले जमीन, फिर अंतिम संस्कार’… घंटों तक रोका अपने ही पिता का जनाजा

Amroha News: अमरोहा में जमीन के विवाद के चलते बड़े बेटे ने अपने ही पिता का जनाजा रोक दिया। पुलिस और पंचायत की मध्यस्थता के 4 घंटे बाद शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जाने पूरा मामला...

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May 03, 2026
Son stops father funeral procession | फोटो सोर्स- patrika.com

Amroha News: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों को तार-तार कर दिया है। डिडौली कोतवाली क्षेत्र के सलारपुर माफी गांव में जमीन के लालच में एक बड़े बेटे ने अपने ही पिता का जनाजा रोक दिया। इस अजब-गजब विवाद के कारण कब्रिस्तान में कब्र खोद रहे लोगों को भी वापस लौटना पड़ा। जिसके कारण गांव में तनाव का माहौल बन गया, वहीं बाद में पुलिस और ग्राम प्रधान की मौजूदगी में चार घंटे तक पंचायत चली। दोनों पक्षों में समझौते के बाद पिता के शव को दफनाया गया।

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क्या है पूरा मामला?

गांव सलारपुर माफी के रहने वाले शफीक अहमद पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। उनकी देखभाल उनका छोटा बेटा राशिद कर रहा था। परिवार में पत्नी जाफरी, बड़ा बेटा आसिफ, छोटा बेटा राशिद और दो बेटियां हैं। शफीक अहमद के पास कुल साढ़े छह बीघा जमीन थी। जिसमें से उन्होंने अपनी चार बीघा जमीन दो महीने पहले ही छोटे बेटे राशिद के नाम कर दी थी। इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच विवाद चल रहा था।

वसीयत को लेकर शुरू हुआ विवाद

बीमारी ज्यादा होने पर 22 अप्रैल को राशिद उन्हें ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल ले गया था, जहां शनिवार सुबह शफीक अहमद का निधन हो गया। शनिवार सुबह करीब आठ बजे छोटा बेटा राशिद अपने पिता का शव लेकर गांव पहुंचा और कब्रिस्तान में दफनाने की तैयारी शुरू हुई। गांव के कुछ लोग कब्र खोद ही रहे थे कि तभी बड़ा बेटा आसिफ वहां पहुंच गया और जमीन के बंटवारे को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। उसने कब्र खोद रहे लोगों को भगा दिया और पिता के नाम की जमीन में से बराबर का हिस्सा मांगने लगा।

चार घंटे तक चली पंचायत

जनाजा रुकने की खबर सुनकर मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। मामले को बढ़ता देख छोटे बेटे राशिद ने पुलिस को सूचना दी। डिडौली कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र बालियान अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। ग्राम प्रधान, रिश्तेदारों और पुलिस की मौजूदगी में दोनों भाइयों के बीच सुलह के लिए चार घंटे तक पंचायत चली। अंत में सबने मिलकर यह फैसला किया कि शफीक अहमद की संपत्ति को पत्नी और दोनों बेटों के बीच तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाएगा।

पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार

समझौता होने के बाद तनाव शांत हुआ। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि जमीन के विवाद के कारण बड़े बेटे ने जनाजा रोक दिया था, लेकिन दोनों पक्षों के बीच जिम्मेदार लोगों की मध्यस्थता से सुलह करवा दी गई है। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में मृतक को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

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