Amroha News: यूपी के अमरोहा जिले में टीबी के बढ़ते मामलों को देखते हुए 282 गांवों को हाईरिस्क घोषित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग इन क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाकर संदिग्ध लोगों की जांच करेगा और मरीज मिलने पर तुरंत मुफ्त इलाज शुरू किया जाएगा।
TB High Risk Villages Amroha: अमरोहा जिले में टीबी (क्षय रोग) के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिले के 282 गांवों को हाईरिस्क श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इन गांवों में विशेष स्वास्थ्य कैंप लगाए जाएंगे, जहां संदिग्ध मरीजों की जांच की जाएगी और संक्रमित पाए जाने पर तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा। मार्च से लेकर 13 अप्रैल तक जिले में 366 नए टीबी मरीज सामने आए हैं, जिनका उपचार जारी है।
टीबी पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण इलाकों में व्यापक स्तर पर जांच अभियान शुरू किया है। पोर्टेबल मशीनों के माध्यम से ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्हें एक सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी, बुखार या अन्य लक्षण हैं। विभाग का उद्देश्य है कि बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ लिया जाए, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके और मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अमरोहा तहसील में 102 गांव, हसनपुर में 94 गांव और धनौरा क्षेत्र में 85 गांव हाईरिस्क श्रेणी में शामिल किए गए हैं। इन क्षेत्रों में विशेष रूप से स्वास्थ्य टीमों को सक्रिय किया गया है, जो घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। वर्तमान में जिले में कुल 2518 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह ने लोगों से अपील की है कि जो मरीज टीबी की दवा ले रहे हैं, वे अपना पूरा कोर्स अवश्य पूरा करें। उन्होंने चेतावनी दी कि बीच में दवा छोड़ने से बीमारी और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है। नियमित दवा सेवन और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है।
सीएमओ डॉ. योगेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि अब टीबी लाइलाज बीमारी नहीं रही है। सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध है और मरीजों को पौष्टिक आहार के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि अगर किसी में टीबी के लक्षण दिखें तो घबराने की बजाय तुरंत जांच कराएं और समय पर इलाज शुरू करें। जिले की कई ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं, जो इस अभियान की सफलता का प्रमाण है।