
Ashoknagar Business Success Story: कड़ी मेहनत, स्पष्ट विजन और पक्का इरादा हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। मध्यप्रदेश के अशोकनगर शहर के रामस्वरूप शिवहरे इसकी मिसाल हैं। 1981 में गांव से शहर आकर 700 रुपए महीने की प्राइवेट नौकरी करने वाले रामस्वरूप आज जिले के प्रतिष्ठित कारोबारी हैं। उनका जुनून इस कदर था कि उन्होंने अपने किताबों के व्यापार के लिए गणित के सरकारी शिक्षक की नौकरी तक ठुकरा दी। 400 रुपए किराए की दुकान और महज 700 रुपए की किताबों से शुरु हुआ उनका सफर आज स्टेशनरी की पांच दुकानों और एक फैक्ट्री तक पहुंच गया है।
55 वर्षीय रामस्वरूप शिवहरे बताते हैं कि वह मूल रूप से बर्रा गांव के रहने वाले हैं। 1981 में जब वह छठवीं कक्षा में थे, तब बेहतर पढ़ाई के लिए बड़े भाई के साथ अशोकनगर आए थे। यहां उन्होंने बीएससी गणित, एमए अंग्रेजी साहित्य और बीएड तक की शिक्षा 1995 में पूरी की। शुरुआत में उन्होंने एक प्राइवेट स्कूल में 700 रुपए प्रतिमाह पर पढ़ाना शुरू किया, लेकिन उनके मन में युवाओं के लिए कुछ अलग करने की चाह थी।
शिक्षण के दौरान रामस्वरूप ने महसूस किया कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए न तो पर्याप्त किताबें मिल पाती हैं और न सही मार्गदर्शन। इससे उन्होंने 400 रुपए महीने पर एक दुकान किराए पर ली। महज 700 रुपए की पूंजी से किताबें रखकर व्यापार का श्रीगणेश किया। शुरुआत में उन्होंने सरकारी नौकरियों के फॉर्म बेचना व युवाओं को मार्गदर्शन देना शुरु किया। गरीब छात्रों को सस्ते में अध्ययन सामग्री मिल सके, इसके लिए उन्होंने पुरानी (सेकंड हैंड) किताबों के एक्सचेंज और खरीद-बिक्री का मॉडल भी अपनाया।
रामस्वरूप की मेहनत और विजन रंग ला रहा था। वर्ष 2006 में उनका चयन सरकारी शिक्षक गणित के पद पर हो गया। अमूमन हर युवा का सपना सरकारी नौकरी होता है, लेकिन रामस्वरूप ने अपने बढ़ते व्यापार व युवाओं के मार्गदर्शन के जुनून के चलते इस सरकारी नौकरी को छोड़ दिया और पूरा ध्यान अपने काम पर लगा दिया। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया। आज उनका कारोबार थोक और फुटकर स्टेशनरी की पांच दुकानों में तब्दील हो चुका है। इसके अलावा भतीजे को पाइप फैक्ट्री भी स्थापित कराई, वहीं परिवार में तीन सदस्य शासकीय शिक्षक हैं।
एक सफल व्यवसायी होने के साथ रामस्वरूप शिवहरे समाज को स्वस्थ रखने भी काम कर रहे हैं। पतंजलि संस्था से जुडक़र जिला योग प्रशिक्षक बन चुके हैं और लोगों को निरोग रहने के गुर सिखा रहे हैं। उनकी यह कहानी उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखने और उसे पूरा करने की हिम्मत रखते हैं।