
बीजिंग: चीन में एक चर्च को बंद करने और ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबल को जलाने का मामला सामने आया है। चीन राजधानी बीजिंग में सबसे बड़े चर्च 'जियोन' को बंद करा दिया गया है। जियोन चर्च पर बिना लाइसेंस चलाने का आरोप था। वहीं कई प्रांतों में बाइबिल और पवित्र चिह्न क्रास को भी नुकसान पहुंचाया गया है। गौरतलब है कि बीते कुछ समय में कम्युनिस्ट सरकार सभी धर्मों की जांच परख करने में जुटी है। दरअसल चीन के कानून के अनुसार प्रत्येक धार्मिक स्थान को प्रशासन से मान्यता लेनी होती है। चीनी सरकार खासकर ईसाई समुदाय के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
लोगों के लिए जा रहे हस्ताक्षर
देश में धर्मो की निगरानी करने वाली संस्था के अनुसार चर्च बंद कराने के साथ ईसाइयों से अपना धर्म छोड़ने के लिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। अमरीकी स्थित चीन एड समूह के बॉब फू ने कहा, 'चीन में धार्मिक मान्यताओं की आजादी के उल्लंघन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सचेत रहना चाहिए।' राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन में लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता नाटकीय रूप से सिकुड़ती जा रही है और इसका धर्म पर बुरा असर पड़ रहा है।
ईसाई धर्मों के खिलाफ शिकंजा
वर्तमान में चीन में 3.8 करोड़ प्रोटेस्टेंट ईसाई हैं। आने वाले समय में चीन में दुनिया की सबसे बड़ी ईसाई आबादी होगी। इन्हीं संभावनाओं के बीच कुछ समय से ईसाई समुदाय को बड़े सुनियोजित ढ़ंग से कम करने की कवायद की जा रही है। जिनपिंग सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि सरकार ईसाइ धर्म को कम करने के लिए इस तरह के हंथकंडे अपना रहे हैं। ईसाइयों के अलावा उइगर मुसलमानों पर भी सरकार ने निशाना बनाया है। देश के उत्तर-पश्चिमी प्रांत में करीब 10 लाख उइगर मुसलमानों को मनमाने ढ़ंग से हिरासत में रखा गया है।