HIGHLIGHTS चीन ( China ) ने कहा कि उसने विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) के साथ COVID-19 को लेकर सूचना साझा करने में देरी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट में ये बात कही गई है कि WHO बीजिंग द्वारा सूचना के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण देरी से निराश था क्योंकि कोरोना वायरस ( Coronavirus ) के प्रकोप ने जनवरी में चीन में पकड़ बना ली थी।

बीजिंग।कोरोना वायरस ( coronavirus ) को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ( World Health Organization ) समेत पूरी दुनिया को अंधेरे में रखने का आरोप झेल रहे चीन ने बुधवार को जवाब दिया है।
चीन ने कहा कि उसने विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) के साथ COVID-19 को लेकर सूचना साझा करने में देरी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट में जानकारी छुपाने की बात पूरी तरह से असत्य है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ( Foreign ministry spokesman Zhao Lijian ) ने एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के बारे में एक सवाल के जवाब में ये बातें कही है। मीडिया रिपोर्ट में ये बात कही गई है कि WHO बीजिंग द्वारा सूचना के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण देरी से निराश था क्योंकि कोरोना वायरस के प्रकोप ने जनवरी में चीन में पकड़ बना ली थी।
कई दस्तावेजों के खुलासे से चीन पर उठे सवाल
आपको बता दें कि मंगलवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ( Ameican President Donald Trump ) ने एक बार फिर से चीन पर कोरोना की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। इस बार ट्रंप ने कई दस्तावेजों का हवाला दिया। जो दस्तावेज और रिपोर्ट सामने आए हैं उसमें ये बताया गया है कि चीन ने जानकारी छिपाई है।
दस्तावेजों, साक्षात्कारों और आंतरिक रिकॉर्डिंग पर आधारित व्यापक रिपोर्ट में मंगलवार को पाया गया है कि WHO और चीन के अधिकारियों के बीच समन्वय नहीं था। हालांकि इसके बावजूद संस्था ने हमेशा चीन का आभार प्रकट किया। संयुक्त राष्ट्र ( United Nation ) स्वास्थ्य एजेंसी की ओर से आयोजित आंतरिक बैठकों की रिकॉर्डिंग में ये बात सामने आई है कि चीन ने रोगियों और मामलों पर दो सप्ताह तक विस्तृत डेटा देने में देरी की। इसके अलावा, चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने तीन प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट आने के बाद भी चुप्पी साधे रखी।
WHO ने 30 जनवरी को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया। इस अवधि में, प्रकोप 100 से 200 गुना तक पूरी दुनिया में फैल गया था। रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि WHO खुद भी इस बात को लेकर चिंतित था। दुनिया को खतरे का आकलन करने के लिए चीन उसको पर्याप्त सूचनाएं नहीं दे रहा था। जिससे कीमती वक्त बर्बाद हुआ।
एक बैठक में डब्ल्यूएचओ के शीर्ष अधिकारी डॉ. गौडेन गालिया ने बताया कि चीन अपने सरकारी चैनल पर सूचना प्रसारित होने से महज 15 मिनट पहले जानकारी साझा कर रहा है। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है जब चीन के साथ WHO भी सवालों के घेरे में है।