एशिया

आर्टिकल 370: मालदीव ने मोदी सरकार के फैसले का किया समर्थन, बताया भारत का आंतरिक मामला

जम्मू-कश्मीर से Article 370 समाप्त करने को लेकर पाकिस्तान और ब्रिटेन ने विरोध जताया है श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे को आंतरिक मामला बताया है

2 min read
Aug 07, 2019
मालदीव

माले। केंद्र की मोदी सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 को खत्म करने को लेकर दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई देशों ने मोदी सरकार के फैसले पर सहमति जताते हुए इसे भारत का आंतरिक मामला बताया है, तो कई देशों ने इसपर विरोध जताया है।

इसी कड़ी में श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात ( UAE ) के बाद अब मालदीव ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति को बदलने के लिए मोदी सरकार की ओर से उठाए गए कदम का समर्थन किया है।

आर्टिकल 370: भारत के कदम से बौखलाया पाकिस्तान , इमरान खान ने पुलवामा जैसे हमले की दी चेतावनी

मालदीव ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भारत का 'आंतरिक मामला' है। मालदीव ने एक बयान में कहा, 'भारतीय संविधान के अनुच्छेद-370 के संबंध में भारत सरकार द्वारा लिया गया निर्णय एक आंतरिक मामला है।’ बयान में आगे कहा गया है 'हम मानते हैं कि हर संप्रभु राष्ट्र को अपने कानूनों में संशोधन करने का अधिकार है।’

श्रीलंका और UAE ने किया समर्थन

बता दें कि मंगलवार को श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने लद्दाख को एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने का समर्थन किया। विक्रमसिंघे ने एक ट्वीट में कहा कि लद्दाख का निर्माण और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन भारत का आंतरिक मामला है।

इसके अलावा UAE के राजदूत अहमद अल बन्ना ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के भारत सरकार के फैसले पर उनके देश का ध्यान भी गया है। उन्होंने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है, जिसका उद्देश्य क्षमता में सुधार करना है।

अहमद अल बन्ना ने कहा, 'राज्यों का पुनर्गठन स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक अनोखी घटना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय असमानता को कम कर अपनी कार्यक्षमता में सुधार करना है।’ उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर के संबंध में लिए गए निर्णय को भारतीय संविधान द्वारा निर्धारित एक आंतरिक मामला बताया।

पाकिस्तान और ब्रिटेन ने जताया विरोध

पाकिस्तान और ब्रिटेन ने भारत के फैसले पर आपत्ति जताई है। पाकिस्तान ने कहा है कि भारत का यह फैसला गैर संवैधानिक और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। वहीं इस मुद्दे पर ब्रिटिश सांसदों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।

कश्मीर पर ब्रिटेन के 'ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप" (एपीपीजी) ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब को मानवाधिकारों की चिंताओं को लेकर एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने पूछा है कि क्या ब्रिटेन सितंबर में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे को उठाएगा।

Read the Latest World News on Patrika.com. पढ़ें सबसे पहले World News in Hindi पत्रिका डॉट कॉम पर. विश्व से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर.

Published on:
07 Aug 2019 07:31 pm