
नॉर्थ कोरिया और अमरीका में तनातनी जारी है। अमरीका के एक कदम को लेकर उत्तर कोरिया ने फिर से चेतावनी दी है। दरअसल अमरीका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं के बीच अगले माह संयुक्त सैन्य अभ्यास होने वाला है। नॉर्थ कोरिया को इस पर आपत्ति है। वे नहीं चाहता कि अमरीका और दक्षिण कोरिया की नजदीकियां सैन्य रूप से और बढ़ें। इस पर उत्तर कोरियाई अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि सैन्य अभ्यास से दोनों देशों के सांमजस्य प्रयासों को कोई नुकसान पहुंचा, तो उत्तर कोरिया को अमरीका के साथ निपटने को मजबूर होना पड़ेगा। वह न तो वार्ता की अपील करेंगे और ना ही अमरीका से निपटने के लिए सैन्य विकल्प से भागेंगे।
बता दें, उत्तर कोरिया और अमरीका में प्रमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। नॉर्थ कोरिया की ओर से एक के बाद एक परमाणु परीक्षण करने से दुनिया के अन्य देशों की चिंताएं भी बढ़ी हुई हैं। अमरीका भी उत्तर कोरिया के ऐसे कदमों से परेशान है। उत्तर कोरिया, अमरीका को कई बार परमाणु हमले की धमकी दे चुका है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नॉर्थ कोरियाई नेता किम जोंग उन में जबानी जंग भी चलती रहती है।
उत्तर कोरिया की ऐसी कार्रवाइयों से तंग अमरीका ने उस पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हुए हैं। ट्रंप नॉर्थ कोरिया के खिलाफ एक प्रस्ताव लाने के भी संकेत दे चुके हैं, ताकि उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।
इस बीच, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन ने कहा है कि अमरीका और उत्तर कोरिया पूर्वाग्रह छोड़कर आपसी बातचीत की ओर कदम बढ़ाने चाहिएं।
बिना कोई शर्त वार्ता करे अमरीका
दक्षिण कोरिया के इस बयान के बाद उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमरीका के साथ वार्ता संभव है। साथ ही अमरीका से बिना किसी पूर्व शर्त के वार्ता करने का आग्रह किया। प्रवक्ता के अनुसार- उत्तर कोरिया और अमरीका के दशकों लंबे इतिहास में ऐसा कोई भी मामला नहीं है, जब हमने अमरीका से किसी भी तरह की पूर्व शर्त के साथ वार्ता की हो। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया शांतिपूर्ण तरीके से सभी मामलों को सुलझाने का इच्छुक है।
कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के एक अधिकारी के अनुसार- वार्ता के जरिए शांतिपूर्ण तरीकों से मुद्दों को सुलझाने के लिए यह उत्तर कोरिया की सैद्धांतिक स्थिति है। जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया यह मानता है कि अमरीका प्योंगयांग की तेजी से बढ़ रही परमाणु क्षमता से डरा हुआ है।