
नई दिल्ली। हर तकनीक का दुरुपयोग करने का आदि पाकिस्तान अब ड्रोन के लिए एक नया काम ढूंढ लाया है। पाकिस्तान के तस्कर अब ड्रोन के जरिए ड्रग्स की सप्लाई कर रहे हैं। भारत-पाक सीमा पर हाल ही में तस्करी का यह नया ट्रेंड तेजी से फैल रहा है। इसी तरह के मामला साहारन में भी देखा गया था। तस्करी के लिए हर दिन नई तरकीब ईजाद करने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले स्कूबा डायविंग का भी इस्तेमाल किया गया था।
सेना ने पहचाना तो लौटा पाकिस्तान
बीएसएफ की खुफिया ईकाई से जुड़े सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में पंजाब के गुरुदासपुर में ग्रामीण तस्करों के जरिए इसकी जानकारी मिली है। इसके अनुसार एक प्लास्टिक बैग में रखे नशीले पदार्थ को लेकर ड्रोन करीब 200 मीटर की ऊंचाई पर था। इस दौरान बीएसएफ ने पहचान लिया तो ड्रग्स की डिलिवरी किए बिना उसे वापस पाकिस्तान में बुला लिया गया।
...ये हैं तस्करों के मुख्य ठिकाने
बीएसएफ के पास करीब साढ़े पांच सौ किलोमीटर के बॉर्डर को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। सूत्रों का कहना है कि ड्रग्स की तस्करी का सबसे ज्यादा काम अबोहर, फिरोजपुर, अमृतसर और गुरदासपुर जिले हैं। 2017 में बीएसएफ ने 270 किलो हेरोइन बरादम की थी।
ड्रोन से पहले स्कूबा डायविंग से होता था काम
बीएसएफ के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक तस्करी के लिए ड्रोन से पहले भी नई तरकीबें आजमाई जाती रही हैं। इससे पहले ट्रेंड स्कूबा डाइवर्स के जरिए सतलज और रावी नदी के रास्ते भी ड्रग सप्लाई की जाती थी।