HIGHLIGHTS साउथ चाइना सी ( South China Sea ) में ताइवान ( Taiwan ) के इलाके पर अपना दावा करने वाले चीन ने युद्धाभ्यास के नाम पर हजारों की संख्या में सैनिकों की तैनाती कर दी है। चीन के बढ़ते आक्रामक तेवर को देखते हुए ताइवान ने भी किसी भी हमले की आशंका के मद्देनजर लगभग 200 मरीन कमांडोज ( Taiwan Marines ) की एक कंपनी को प्रतास द्वीप ( Pratas Island ) पर तैनात कर दिया है।
ताइपे। साउथ चाइन सी ( South China Sea ) में अमरीका ( America ) के साथ बढ़ते टकराव के बीच चीन ने अब ताइवान ( Taiwan ) के सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर दी है। ताइवान और चीन के बीच युद्ध ( China Taiwan War ) के हालात बन गए हैं। साउथ चाइना सी में ताइवान के इलाके पर अपना दावा करने वाले चीन ने युद्धाभ्यास के नाम पर हजारों की संख्या में सैनिकों की तैनाती कर दी है।
सीमा पर चीन के बढ़ते आक्रामक तेवर को देखते हुए ताइवान ने भी किसी भी हमले की आशंका के मद्देनजर लगभग 200 मरीन कमांडोज ( Taiwan Marine Commandos ) की एक कंपनी को प्रतास द्वीप पर तैनात कर दिया है। ऐसे में इस संभावना से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि चीन और ताइवान के बीच युद्ध छिड़ सकता है।
ताइवान ने खुफिया जानकारी के हवाले से बताया है कि चीनी सेना ( Chinese Army ) इस द्वीप पर हमले की योजना बना रही है। चूंकि चीन ताइवान समेत इस द्वीप पर अपना दावा करता है। चीन में प्रतास द्वीप ( Pratas Island ) को डोंगसा के नाम से जाना जाता है।
ताइवान पर हमला करने की चीन की साजिश
जापान के क्योडो न्यूज ने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ( People's Liberation Army ) हैनान द्वीप पर बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण अभ्यास करने की योजना बना रहा है। इस दौरान चीनी सैना अभ्यास के षड़यंत्र के तहत ताइवान-नियंत्रित द्वीपों पर कब्जे का प्रयास भी करेगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि PLA के दक्षिणी कमांड थिएटर के निर्देशन में होने वाले इस युद्धाभ्यास में बड़े पैमाने पर मरीन कमांडो, लैंडिंग शिप्स होवरक्राफ्ट और सैन्य हेलिकॉप्टर शामिल होंगे।
आपको बता दें कि साउथ चाइना सी में स्थित प्रतास द्वीप दो समुद्री तट और दो प्रवाल भित्तियों ( Coral Reef ) से मिलकर बना है। यह द्वीप ताइवान के दक्षिणी तटीय शहर काऊशुंग से लगभग 445 किलोमीटर और चीन की मुख्य भूमि से सिर्फ 300 किमी की दूरी पर स्थित है।
इस क्षेत्र की खासियत यानि इसके मूंगा भित्तियों और समुद्री शैवाल पारिस्थितिकी तंत्र के कारण एक राष्ट्रीय उद्यान नामित किया गया है। यहां स्थायी तौर पर मानव आबादी नहीं रहती है।