हीरा एक शक्तिशाली रत्न है जो सही व्यक्ति को सुख, सौंदर्य और सफलता देता है, लेकिन गलत व्यक्ति के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए हीरा पहनने से पहले कुंडली की जांच और विशेषज्ञ की सलाह बेहद जरूरी है।
हीरा यानी डायमंड केवल एक कीमती रत्न ही नहीं, बल्कि ज्योतिष में इसे बेहद प्रभावशाली माना गया है। आम जीवन में लोग इसे फैशन, स्टेटस और सुंदरता के लिए पहनते हैं, लेकिन ज्योतिष के अनुसार हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है और इसका असर व्यक्ति के जीवन, रिश्तों और स्वास्थ्य तक पर पड़ता है। इसलिए बिना जानकारी और सलाह के हीरा पहनना नुकसानदायक भी हो सकता है।
ज्योतिष शास्त्र में हीरे को शुक्र ग्रह का प्रतिनिधि रत्न माना जाता है। शुक्र सुख, सौंदर्य, प्रेम, वैवाहिक जीवन, विलासिता और ग्लैमर का कारक ग्रह है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र मजबूत हो या अनुकूल स्थिति में हो, तो हीरा धारण करने से जीवन में ऐश्वर्य, आकर्षण और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है। हीरा रक्त संचार (Blood Circulation) और हार्मोनल बैलेंस पर भी प्रभाव डालता है।
वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न वालों के लिए हीरा सामान्यतः शुभ माना जाता है। ग्लैमर, मीडिया, फिल्म, संगीत, फैशन और आर्ट से जुड़े लोगों को भी हीरा विशेष लाभ दे सकता है। सही कुंडली में हीरा प्रेम संबंधों और दांपत्य जीवन को मजबूत करता है और नाम-यश बढ़ाने में मदद करता है।
मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न वालों के लिए हीरा प्रायः अनुकूल नहीं होता। जिन लोगों को डायबिटीज, रक्त विकार या वैवाहिक समस्याएं हों, उन्हें बिना विशेषज्ञ सलाह के हीरा नहीं पहनना चाहिए। आध्यात्मिक उन्नति चाहने वाले लोगों के लिए भी हीरा बाधक बन सकता है।
हीरा हमेशा शुद्ध, बिना दाग और बिना टूटा हुआ होना चाहिए। टूटा या दागदार हीरा अपयश और दुर्घटना का कारण बन सकता है। 21 से 50 वर्ष की उम्र के बीच हीरा पहनना अधिक उपयुक्त माना गया है। हीरे के साथ मूंगा या गोमेद पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे चरित्र और संबंधों में समस्या आ सकती है।
वास्तु के अनुसार घर में एक सीध में तीन या उससे अधिक दरवाजे नहीं होने चाहिए, वरना धन हानि और अशांति बढ़ती है। शनिवार के दिन प्रातः हनुमान चालीसा का पाठ करने से दिन भर के कार्यों में सफलता मिलती है।