धर्म/ज्योतिष

Gangaur Puja 2026: कब से शुरू है गंगौर पूजा? क्यों खास हैं 16 दिन की साधना और श्रृंगार का महत्व?

Gangaur Puja 2026 Start Date and End Date: गणगौर का पर्व माता गौरी (पार्वती) और ईसर (भगवान शिव) को समर्पित है। सुहागिन महिलाएं अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि के लिए और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।
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Feb 24, 2026
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gangaur vrat significance in hindi|फोटो सोर्स- Chatgpt

Gangaur 2026 Start Date and End Date: हिंदू परंपरा में Gangaur सुहाग, श्रद्धा और अटूट दांपत्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। आगरा गेट गणेश मंदिर के पुरोहित पंडित घनश्याम आचार्य के अनुसार वर्ष 2026 में पूर्णिमा और प्रतिपदा तिथि 4 मार्च को होने से इसी दिन ईसर-गणगौर पूजन का शुभारंभ होगा। भाग्य की कामना से व्रत रखेंगी, वहीं कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति हेतु माता गौरी की आराधना करेंगी। सोलह दिन की साधना और सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व इस पर्व को आध्यात्मिक रूप से और भी पावन बनाता है।

Gangaur Festival Date: गणगौर पूजा 2026 कब से शुरू होगी?

Gangaur festival 2026 India|फोटो सोर्स- Chatgpt


वर्ष 2026 में Gangaur पूजा की शुरुआत 4 मार्च से होगी, क्योंकि इस दिन पूर्णिमा और प्रतिपदा तिथि का संयोग है। यह पर्व 16 दिनों तक चलेगा और 21 मार्च को चैत्र शुक्ल तृतीया पर विधि-विधान, विसर्जन और शोभायात्रा के साथ संपन्न होगा।

क्यों खास है गणगौर के 16 दिनों का महत्व?

गणगौर का पूरा उत्सव “16” अंक से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 16 दिनों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया।इसी कारण से यह पर्व 16 दिनों तक मनाया जाता है और हर पूजा सामग्री 16 की संख्या में अर्पित की जाती है।

गणगौर में 16 अंक क्यों विशेष है?


हिंदू परंपरा में 16 संख्या को पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना गया है, जिसे षोडश कला और सोलह संस्कारों से भी जोड़ा जाता है। Gangaur पूजा में 16 प्रकार की पूजन सामग्री, 16 बार काजल/रोली/मेहंदी से बिंदियां लगाना, 16 व्यंजनों का भोग और सोलह श्रृंगार करना माता गौरी की कृपा और अखंड सौभाग्य की कामना से किया जाता है।

गणगौर के सोलह श्रृंगार का महत्व

गणगौर के दौरान महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, जो सौभाग्य, सुंदरता और समृद्ध दांपत्य जीवन का प्रतीक हैं।

  • सोलह श्रृंगार की सूची
  • मांग टीका
  • बिंदिया
  • काजल
  • नथ
  • सिंदूर
  • मंगलसूत्र
  • बाली
  • मेहंदी
  • चूड़ियां
  • गजरा
  • बाजूबंद
  • अंगूठी
  • कमरबंद
  • पायल
  • बिछिया
  • वस्त्र

गणगौर से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव की प्रतिमा बनाकर 15 दिनों तक कठोर तपस्या की। 16वें दिन उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।इसके बाद माता पार्वती की विदाई बड़े उत्सव और हर्षोल्लास के साथ हुई। यही परंपरा आज भी गणगौर पर्व में निभाई जाती है, जहां ईसर-गौरी की प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाती है।राजस्थान में ईसर को भगवान शिव और गणगौर को माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है।

राजस्थान में गणगौर की खास पहचान

Gangaur का पर्व राजस्थान में अत्यंत भव्यता और उत्साह के साथ मनाया जाता है। Jaipur की शाही सवारी, Udaipur में पिछोला झील किनारे सजी नावों का मनमोहक दृश्य और Bikaner की पारंपरिक शाही गणगौर इस उत्सव को खास पहचान देते हैं। लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा और रंग-बिरंगी सजावट पूरे माहौल को जीवंत बना देती है।

Updated on:
24 Feb 2026 12:37 pm
Published on:
24 Feb 2026 12:36 pm