
Ketu Awakening Effects-शनि के दंड, राहु के अचानक मिलने वाले लाभ, गुरु के आशीर्वाद और शुक्र के सुख-सुविधाओं की चर्चा तो हर कोई करता है, लेकिन नवग्रहों में एक ऐसा ग्रह भी है जिसकी भूमिका सबसे अलग मानी जाती है। यह ग्रह बिना शोर किए व्यक्ति के जीवन में बड़े बदलाव लाता है। पंडित पंकज उपाध्याय के अनुसार, जब यह ग्रह जागृत होता है तो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों, रिश्तों में अलगाव, आर्थिक उतार-चढ़ाव और मानसिक संघर्षों से गुजरना पड़ सकता है।
शनि के दंड से लोग डरते है। बृहस्पति से सब आशीर्वाद की उम्मीद रखते है। वहीं, शुक्र से चाहते है पूरा जीवन ऐशो आराम से गुजरे। हर ग्रह के स्वभाव के अनुसार लोगो ने उसकी छबि मन में बना रखी है और उस से वैसी ही अपेक्षा रखते है। परंतु इनमे एक ग्रह छूट जाता है। यह गृह बड़ा छुप कर काम करता है। यह ईश्वर कां सीधा प्रतिनिधि माना जाता है और योग्यता अनुसार फल और दंड देते समय पीढ़ा भी देता है। फालतू रिश्तों से दूर करने के लिए अलगाव भी और योग्य बनाने हेतु शिक्षा भी,ये नव ग्रहों में सबसे कम बात की जाने वाला ग्रह है। केतु के जब जागृत होता है तो कठोर शिक्षा देता है। यह कोई समझौता नहीं करता। भावनाओं का इसके पास कोई कार्य नहीं होता है।
केतु मुक्ति देता है। अनावश्यक रिश्तों से और भोग विलास के बंधन से, केतु जानता है कि व्यक्ति को ईश्वर से जुड़ने और अपने जन्म लेने के उद्देश्य को पूर्ण करने से सिर्फ सुख सुविधाओं का बंधन रोकता है। केतु ये अहसास करा देता है कि मनुष्य अकेले हो और उसे सिर्फ अपने उद्देश्य पर काम करना है। इसके लिए मनुष्य को तभी उसे सीधे ईश्वर से जुड़े रहना है और कोई सांसारिक रिश्ता असली नहीं है।
केतु फल देते वक्त बहुत अधिक कठोर बन जाता है। इसलिए उसके फल बहुत अधिक दर्द से भरे रहते है। अब चाहे वो आर्थिक नुकसान हो, स्वास्थ्य समस्या या दुर्घटना हो, सामाजिक या पारिवारिक क्षति हो, नव ग्रहों में सर्वाधिक कष्टकारी प्रभाव केतु का ही होता है। दरअसल केतु पूरी तरह से आध्यात्मिक ग्रह है एवं वो व्यक्ति को सीधे ईश्वर से जोड़ने का कार्य करता है।
पंडित पंकज के अनुसार को मनुष्य अनावश्यक की दिखावे वाली भीड़ से अकेले में खुश रह सकता है उसे केतु अच्छे फल देता है। झूठे रिश्तों का दिखावा करने पर अलगाव पैदा होगा जिससे अकेलेपन का जन्म होगा।
एकाग्रता और ध्यान ये दो तरीके केतु के दोष दूर कर सकते है। जितना ध्यान भटकेगा केतु उतना ही खराब फल देगा। अगर केतु खराब है तो जिस ग्रह के साथ है उसे दूषित कर देगा। कोई भी फैसला लेते समय धैर्य रख शांत मन से सोचे, गुरु अर्थात मार्गदर्शक केतु को विपरीत फल देने से बचाता है। हर कार्य सलाह ले कर करे, हमारे आस पास के किसी भी रिश्ते को मार्गदर्शक बना ले।